जोड़ों में दर्द से फेफड़ों और दिल को नुकसान

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नई दिल्ली (खबर संसार)
कमर में अकडऩ पीठ और जोड़ो की शिकायत को हल्के में न लें। आपको स्पांडिलाइटिस की शिकायत हो सकती है। स्पांडिलाइटिस से दिल फेफड़े और आंत समेत शरीर के कही अंग प्रभावित हो सकते हैं। दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के मैटोलोजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ पीडी रथ बताते हैं कि स्पांडिलाइटिस को नजरंदाज करने से गंभीर रोगों का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने बताया कि इससे बड़ी आंत में सूजन यानी कोलाइटिस और आंखों में संक्रमण हो सकता है। स्पांडिलाइटिस एक प्रकार का गठिया रोग है। इसमें कमर से दर्द शुरू होता है और पीठ और गर्दन में अकडऩ के अलावा शरीर के निचले हिस्से जांघ घुटना और टखनों में दर्द होता है। रीड़ की हड्डी में अकडऩ बनती रहती है। स्पांडिलाइटिस में जोड़ों में सूजन के कारण असहनीय दर्द होता है।
युवाओं में स्पांडिलाइटिस की शिकायत ज्यादा
युवाओं में स्पांडिलाइटिस की शिकायत ज्यादा होती है। आमतौर पर 45 से कम उम्र के पुरुषों और महिलाओं में स्पांडिलाइटिस की शिकायत रहती है। बच्चों में जुवेनाइल स्पांडिलोअथ्र्राइटिस होता हैएजोकि 16 साल से कम उम्र के बच्चों में पाया जाता है। यह वयस्क होने तक तकलीफ देता है। इसमें शरीर के निचले हिस्से के जोड़ों में दर्द और सूजन की शिकायत रहती है। जांघ, कुल्हे, घुटना और टखनों में दर्द होता है। इससे लाल आंखें, त्वचा और आंत को भी खतरा पैदा होता है। थकान और अलस सा महसूस होता है।
फिजियोथेरेपी से इलाज संभव
जब जोड़ों में दर्द की शिकायत हो तो उसकी जांच करवानी चाहिए। इससे उम्र बढऩे पर और तकलीफ बढ़ती है। एचएलए.बी 27जांच करवाने से स्पांडिलाइटिस का पता चलता है। एचएलए.बी 27 एक प्रकार का जीन है जिसका पता खून की जांच से चलता है। इसमें खून का सैंपल लेकर लैब में जांच की जाती है। इसके अलावा एमआरआई से भी स्पांडिलाइटिस का पता चलता है। स्पांडिलाइटिस का पता चलने पर इसका इलाज आसान हो जाता है। ज्यादातार मामलों का इलाज दवाई और फिजियोथेरेपी से हो जाता है। कुछ ही गंभीर और दुर्लभ मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
आनुवांशिक बदलाव बीमारी की खास वजह
स्पांडिलाइटिस मुख्य रूप से जेनेटिक म्यूटेशन, आनुवांशिक बदलाव के कारण होता है। एचएलए.बी जीन शरीर के प्रतिरोधी तंत्र को वायरस और बैक्टीरिया के हमले की पहचान करने में मदद करता है लेकिन जब जीन खास म्यूटेशन में होता है तो उसका स्वस्थ प्रोटीन संभावित खतरों की पहचान नहीं कर पाता है यह प्रतिरोधी क्षमता शरीर की हड्डियों और जोड़ों को निशाना बनाता है जो स्पांडिलाटिस का कारण होता है। हालांकि अब तक इसके सही कारणों का पता नहीं चल पाया है।

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