भारतीय दवाओं से दूर होगा भारत-चीन रिश्तों का कैंसर

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नई दिल्ली (खबर संसार)

भारतीय दवाओं को अपने देश में बिकने की इजाजत दे दी है। कम कीमत के चलते पूरी दुनिया में धूम मचाने के बाद अब भारतीय दवाएं चीन के नागरिकों की सेहत भी सुधारेंगी। जिन दवाओं को चीन की सरकार ने अपने यहां आसान एक्सैस दी है उनमें कैंसर की सभी दवाएं शामिल हैं। ऐसे में क्या मान लिया जाए कि दवाएं भारत-चीन रिश्तों का कैंसर भी मिटा देंगी? इससे पहले दोनों देशों के बीच कॉमर्स मिनिस्ट्री के लैवल पर हुई वार्ता के दौरान चीन ने भरोसा दिया था कि वह भारत के साथ व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए कदम उठाएगा। अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार और दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टैंट प्रोफैसर प्रशांत त्रिवेदी के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय नजरिए से चीन की ओर से उठाए गए मौजूदा कदम सकारात्मक हैं। हालांकि यह नहीं मान लेना चाहिए कि चीन सुधर गया है और वह भारत की हर मांग को मान लेगा। प्रशांत के मुताबिक अमरीका के साथ ट्रेड वार के बाद चीन में भारत के लिए तेजी से सैंटीमैंट बदले हैं। अमरीका को छोड़ दिया जाए तो भारत उसका बड़ा ट्रेड पार्टनर है। ऐसे में वह कारोबारी रिश्तों को बेहतर करने की कोशिश कर रहा है। यही कारण है कि उसने मोदी के दौरे के बाद जो बड़े कदम उठाए वे कारोबार से जुड़े हैं। चीनी मीडिया में छपी खबरें इसकी साफ गवाही देती हैं। चीन ने भारत से आने वाली करीब 28 दवाओं से इम्पोर्ट ड्यूटी हटा दी है। इससे भारतीय दवाओं को वहां के बाजार में आसान एंट्री मिल पाएगी। भारतीय फार्मा सैक्टर के लिए यह बड़ी खबर है। इनमें कैंसर की सभी दवाएं शामिल हैं। इससे भारत और चीन के बीच जो व्यापार असंतुलन है उसे भविष्य में कम करने में मदद मिलेगी। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 1 मई से 6 माह तक भारत-चीन के बीच होने वाला कारोबार शुरू हो गया। दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों की औपचारिकताएं समारोहपूर्वक आयोजित की गईं। दोनों देशों के मध्य 1 मई से शुरू होने वाला कारोबार सप्ताह में 4 दिन अगले 6 माह तक (30 नवम्बर) तक जारी रहेगा। पिछले वर्ष डोकलाम तनातनी के कारण मात्र 2 सप्ताह तक ही सीमा व्यापार हुआ तथा वाया नाथुला-कैलाश मानसरोवर की यात्रा भी ठप्प रही। भारत दुनिया के कई देशों को 5.3 अरब डॉलर का चावल एक्सपोर्ट करता है। वहीं चीन सालाना 1.5 अरब डॉलर का चावल विदेशों से इम्पोर्ट भी करता है, पर वह भारत से चावल नहीं खरीदता। चीन में भारत से भैंसों के मांस के आयात पर पूरी तरह रोक है। एल्युमीनियम एलॉय चीन हर साल 87 करोड़ 40 लाख डॉलर कीमत के एल्युमीनियम एलॉय की खरीदारी करता है। वह भारत से इस सामान की खरीदारी केवल 2 लाख डॉलर की ही करता है।

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