बारूद के ढेर में हल्दूचौड़ लालकुआं !

Sharing is caring!

हल्दूचौड़ । खबर संसार।

हल्दूचौड़ लालकुआं के आसपास तमाम पेटï्रोलियम पदार्थो के भण्डारण ,इमारती लकडिय़ों का बड़ी मात्रा में भण्डारण के साथ-साथ दर्जन भर से अधिक पम्प इस क्षेत्र को कभी भी बारूद के ढेर में तब्दील करने में देर नहीं लगायेंगे। क्योंकि हल्दूचौड़ और लालकुआं के आसपास इस तरह की घटनायें घटती रहती है और लोगों की जाने तक जाती रहती है। और ऐसा खासकर गर्मियों के मौसम में ज्यादा होता है। ऐसे में एक बार फि र क्षेत्र में समस्यायें विकट होने वाली है। पुराने रिकार्ड बताते है कि मोटाहल्दू से लालकुआं तक का घना वन क्षेत्र बारुद के ढेर में हैं। गौरतलब है कि विगत 5 सालों के रिकार्डो को देखे तो हर वर्ष गर्मी के दिनों में गौला नदी व आसपास के क्षेत्रों में अग्निकाण्ड से झोपडिय़ों में अज्ञात कारणों से आग लगने की घटना आम हो चुकी है जहां हर वर्ष तमाम मजदूर बेघर हो जाते हंै और यहां से पलायन को मजबूर होते है। दिलचस्प बात यह है कि इन घटनाओं का असली कारण आज तक समझ नहीं आया है। इसके अलावा बेरीपड़ाव क्षेत्र में सुभाष स्टोन क्रेशर के पास भी अग्निकाण्ड से लाखों का नुकसान गर्मी में होता ही रहता है। इसमें सबसे बड़ी देखने वाली बात यह है कि इन क्षेत्रों में पेट्रोलियम पदार्थो के भण्डारण, इमारती लकडिय़ो का भण्डार तथा तमाम पेट्रोल पम्प भी है जो बारुद बनकर कभी इस क्षेत्र को स्वाह करने में देर नहीं लगायेगा। अब हम मोटाहल्दू से लालकुआं तक के भूगौलिक क्षेत्र को देखे तो इसके एक तरफ करोड़ो लीटर पेट्रोलियम पदार्थ व वन निगम की लाखों घन मीटर इमारती बहुमूल्य व जलौनी लकड़ी हैं तो वही दूसरी और जहरीली गैसों का जखीरा हैं। भीषण गर्मी के मौसम में यहां तेज हवायें अपना भयानक रुप दिखाती रहती हैं इसका अनुमान विगत वर्षों में हुई अग्निकाण्डों की घटनाओं से लगाया जा सकता हैं ऐसे में क्षेत्र में अग्निकाण्ड की घटनायें आने वाले समय में विकट हो सकती हैं। जहां एक ओर जिला प्रशासन के पास दमकल की उचित व्यवस्था ना होना एक गम्भीर व चिन्तनीय विषय बना हुआ हैं,वही अग्निशमन विभाग के पास किसी भी आगजनी की घटना से निपटने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं हैं। क्षेत्र के मोटाहल्दू, बेरीपड़ाव, हल्दूचौड़,लालकुआं व बिन्दुखत्ता में लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में निवास करने वाले लाखों लोग व अनेकों सरकारी एवं गैर सरकारी प्रतिष्ठान इस भीषण गर्मी में आगजनी होने के डर के चलते दहशत में रहते हैं। देखा जाये तो लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के मोटाहल्दू में इण्डेन गैस सर्विस का भण्डारण,तमाम पेट्रोल पम्प,शिक्षण संस्थाये,बेरीपड़ाव में महालक्ष्मी मंदिर,हल्दूचौड़ गुमटी जहां भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस की बटालियन के पास हजारो टन ज्वलनशील पेट्रोलियम पदार्थ के भण्डारण क्षमता वाला आईओसी डिपो हैं तो वही आईओसी डिपो से महज कुछ दूरी पर वन निगम के विशाल डिपो हैं जहां लाखों घनमीटर इमारती बहुमूल्य व जलौनी लकड़ी रखी हुई हैं,ऐसे में आग की एक चिंगारी दुर्भाग्यवश इन भण्डारणों तक पहुंच गयी तो सब कुछ खत्म कर सकती हैं।
दूसरी और लालकुआं में सेन्चुरी पेपर मिल व नैनीताल दुग्ध संघ में अमोनिया व अन्य गैसो का विशाल भण्डार भी हैं एक चिंगारी सबकुछ स्वाह कर सकती हैं। जबकि प्रशासन के पास ऐसे हालातों से निपटने के लिए ऊंट के मुंह में जीरा वाली व्यवस्था हैं। विगत वर्षो के रिकार्ड के हिसाब से हल्दूचौड़ व बेरीपड़ाव गौला गेट स्थित लगभग सौ से अधिक श्रमिक झोपडिय़ा जलकर राख हो चुकी हैं,और दमकल विभाग देखता रह गया था। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि क्षेत्र में होने वाली आगजनी की घटनाओं में दमकल विभाग बुलाया तो जाता हैं,पर दमकल विभाग के आग तक पहुंचने में वहां सब कुछ राख हो जाता हैं और बाद में अग्निशमन विभाग अपने कार्य और कर्तव्य की इतिश्री कर लेता हैं।
ज्ञातव्य है कि अग्निशमन विभाग क्षेत्र में होने वाली अग्निकाण्ड की घटनाओं को रोकने एवं उनसे लोगों को सुरक्षित बचाने के लिए कतई गम्भीर नहीं हैं। जबकि तहसील लालकुआं क्षेत्र बारुद के ढेर में बैठा हैं। वही अग्निशमन अधिकारी कहते हैं कि उनके पास किसी भी दुर्घटना से निपटने के लिए मोटर फायर ब्रिगेड दो पम्प व एक मोटर कैनन भी हैं। और चार वाहन बड़े हैं,जिनमें साढ़े चार हजार लीटर पानी आता हैं, परन्तु अग्निशमन अधिकारी मानते हैं कि यदि इन क्षेत्रों में कोई घटना होती हैं,तो वहां के लोगों को सेन्चुरी की फायर ब्रिगेड पर निर्भर रहना पड़ता हैं,तथा उनका कहना है कि क्षेत्र में फायर स्टेशन खोलने के लिए उन्हें जमीन कि उपलब्धता चाहिए और विभाग इसके लिए शीघ्र कार्यवाही करेगा।

Please follow and like us:
0

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *