कर्नाटक का किंग कौन!

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बैगलूरू। खबर संसार।

कर्नाटक विधानसभा का रिजल्ट आ गया है और जनता ने किसी भी दल को स्पष्टï बहुमत नहीं दिया है। हालांकि सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी साबित हुई है कर्नाटक विधानसभा चुनावों में। जनता ने उसे सौ का आंकड़ा पार करा दिया हैं। विदित रहे कि कर्नाटक विधानसभा में 224 सीटें है, फिलहाल 222 सीटों पर चुनाव हुए हंै। और सभी के अंतिम निर्णय आ चुके है। जिसमें भारतीय जनता पार्टी को कुल 104 सीटें मिली है तो दूसरे नम्बर पर कांग्रेस को 78 सीटें मिली है तो तीसरे नम्बर पर जेडीएस को 38 सीटें मिली है। अन्य को दो सीटें । वोटिंग प्रतिशत में कांग्रेस को 38 प्रतिशत तो भारतीय जनता पार्टी को 36 प्रतिशत रहा। जबकि तीसरे नम्बर पर जेडीएस को 19 प्रतिशत रहा। इस तरह जनता जर्नादन ने किसी भी दल को स्पष्टï बहुमत नहीं दिया है। और इसी के साथ जोड़तोड की राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस जेडीएस दोनों अपने-अपने विधायकों को इधर उधर भेजने की तैयारी में लग गई है। कारण कांग्रेस में लिंगायत वाले सात विधायक इस बात का विरोध कर रहे है कि जेडीएस का सीएम नहीं होना चाहिए। तो जेडीएस में भी पांच विधायक बीजेपी के पाले में जाने को तैयार बैठे है। जिस तरह की गोवा विधानसभा में तख्ता पलट हो गया था उसी तरह का अनुमान लग रहा है कि कर्नाटक विधानसभा में भी ऐसा ही होने जा रहा है । क्योंकि बीजेपी जादूई आंकडे से सात सीटें दूर है। तो दूसरी और कांगे्रस ने जेडीएस को मुख्यमंत्री का आफर देकर अपना दांव चल दिया है। कुमारस्वामी ने भी राज्यपाल वजुभाई वाला को चिट्ठी लिख दी है कि उसे कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है लिहाजा उन्हें सरकार बनाने का आफर दिया जाये। बीजेपी ने भी अपना दावा ठोक दिया हैं। संविधान विशेषज्ञ बता रहे है कि सबकुछ राज्यपाल के विवेक पर निर्भर करता है कि वो किसको सरकार बनाने का न्यौता पहले देते है क्योंकि इससे सारे समीकरण उलट पलट हो सकते है। और बीजेपी किसी भी कीमत में कर्नाटक को खोना नही चाहेगी क्योंकि यही से उसका दक्षिण में प्रवेश सम्भव हो पायेगा। फिलहाल सभी की निगाहे राज्यपाल पर टिक गई है। माना जा रहा है। राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को बुला सकते है सरकार बनाने के लिए। दूसरा कारण वजुभाई वाला के नरेन्द्र मोदी से अच्छे सबंध रहे है। हालांकि राज्यपाल ने अभी कुछ भी नहीं कहा है और पर्याप्त विचार विमर्श के बाद ही कुछ निर्णय की बात कही है। हालांकि जो भी सरकार बनायेगा उसे सदन में पर्याप्त बहुमत का आंकडा सिद्घ करना ही होगा। फिलहाल सारी बात राज्यपाल के विवेक पर निर्भर करती हैं। मनोज आर्य

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