अयोध्या विवाद पर सुनवाई का रास्ता साफ

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नई दिल्ली (खबर संसार)
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने ने 1994 के फैसले को फिर से विचार के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजने से साफ इंकार कर दिया। विदित रहे कि यह मुद्दा अयोध्या भूमि विवाद की सुनवाई के दौरान उठा था। वर्तमान में यह मुद्दा उस वक्त उठा जब प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ अयोध्या मामले में 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें अदालत ने राम जन्म्भूमि. बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर अपने फैसले में जमीन को तीन हिस्से में बांट दिया था। और कुल 2,77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों सुन्नी वक्फ बोर्ड निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर. बराबर बांट दिया जाये का फैसला दिया था। आज सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के ढाई दशक पुराने मामले पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि हर धर्म के लिए प्रार्थना स्थल अहम है लेकिन अगर सरकार को लगता है कि अधिग्रहण जरूरी है तो धर्म आड़े नही आयेंगा तथा भूमि विवाद अलग है। आज न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने अपनी और प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की ओर से फैसला सुनाते हुये कहा कि मौजूदा मामले में 1994 का फैसला प्रासंगिक नहीं है क्योंकि उक्त निर्णय भूमि अधिग्रहण के संबंध में सुनाया गया था।

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