चारों दिशाओं में सोने के भी जातक पर अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव

नई दिल्ली (खबर संसार)

बिना सोए कोई व्यक्ति नहीं रह सकता है वो कितना ही कोशिश कर ले पर जब नींद आती हैं तो कोई जगह,मौसम,लोग कुछ भी नहीं दिखाई देता हैं। नींद से सुखदायी कोई भी वस्तु नहीं हैं, दुनिया में नींद सबको बहुत प्यारी हैं,और ये सभी की अवश्यकता भी हैं। कहते है प्राणी बिना खान खाए या फिर बिना पिये रह सकता हैं, मगर बिना सोए कोई नहीं रह सकता हैं। एक वक्त ऐसा आता ही है जब मनुष्य अपने ऊपर काबू नहीं रख पाता है, और नींद के आगोश में चला जाता हैं। वही सोने की भी कई सारी मुद्राएं होती हैं, माना यह जाता हैं, कि उल्टा सोए भोगी, सीधा सोए योगी, दाएं सोए रोगी, बाएं सोए निरोगी। इसके अलावा चारों दिशाओं में सोने के भी जातक पर अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं।
पूर्व दिशा में मस्तक रखकर सोने से विद्या की प्राप्ति होती हैं।
दक्षिण में मस्तक रखकर सोने से धन लाभ और आरोग्य लाभ होता हैं।
पश्चिम में मस्तक रखकर सोने से प्रबल चिंता होती हैं।
उत्तर दिशा में मस्तक रखकर सोने से हानि मृत्यु कारक होती हैं।
सोते वक्त ये सावधानियां बरतें-
मस्तक और पांव की ओर दीपक नहीं रखना चाहिए। दीपक रखें भी तो दायीं या फिर बायी ओर या दूरी पर होना चाहिए। वही संध्याकाल में निद्रा नहीं लेनी चाहिए। शय्या पर बैठे-बैठ निद्रा नहीं लेनी चाहिए। द्वार के उंबरे, देहरी, थलेटी, चौकट पर मस्तक रखकर नींद न लें। ह्रदय पर हाथ रखकर,छत के पाट या बीम के नीचे और पांव पर पांव चढ़ाकर नींद न लें। सूर्यास्त से पहले नहीं सोना चाहिए। पांव की ओर शय्या ऊंची हो तो अशुभ हैं,केवल चिकित्सीय उपचार के लिए छूट हैं। शय्या पर बैठकर खाना-पीना बहुत अशुभ माना जाता हैं।

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