बॉडी क्लॉक के हिसाब से तय करना चाहिए अपना शेड्यूल

नई दिल्ली (खबर संसार)

विभिन्न संस्थानों में काम करने वाले लोगों के लिए अपने मुताबिक शिफ्ट तय कर पाना इतना आसान नहीं है। लेकिनअपने स्वास्थ्य के लिए आपको ऐसा करना ही होगा। ऐसा करने से आपको कई तरह के लाभ होंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जिनकी नींद पूरी नहीं हो पाती।जर्मनी की एक फैक्ट्री में कुछ साल पहले वैज्ञानिकों ने एक रियल वर्ल्ड रिसर्च की, जिसमें उन्होंने जल्दी उठना पसंद करने वाले कर्मचारियों को दिन की शिफ्ट में काम दिया जबकि देर से सोने वाले कर्मचारियों को रात की शिफ्ट का काम दिया गया। इस बदलाव के वैज्ञानिकों को बेहद सकारात्मक परिणाम मिले।फैक्ट्री के ज्यादातर कर्मचारियों को हफ्ते के वर्किंग डे में भी 1 घंटा एक्सट्रा सोने को मिल गया। कुल मिलाकर हम आपको यह बताना चाहते हैं कि जब उनके वर्किंग शेड्यूल को उनकी इंटरनल क्लॉक के हिसाब से बनाया गया तो उन्हें 16 प्रतिशत अतिरिक्त नींद मिली। इसके साथ ही उनके काम में भी सुधार देखा गया। यानी जब हम अपनी इंटरनल क्लॉक के हिसाब से अपनी दिनचर्या बनाते है तो हम हर तरीके से तनाव मुक्त रहते हैं।हालांकि बॉडी क्लॉक के हिसाब से कर्मचारियों को शिफ्ट देना विभिन्न देशों की कंपनियों के लिए एक चुनौती भरा कार्य है, लेकिन कुछ कंपनियों ने इस बात पर अमल करना शुरू कर दिया है। साउथवेस्ट एयरलाइंस, यूएस नेवी और कुछ अन्य कंपनियां अपने कर्मचारियों को शिफ्ट चुनने का मौका देती हैं।वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर कंपनियां कर्मचारियों की बॉडी क्लॉक के हिसाब से उनकी सिफ्ट तय करती हैं तो वह एक बेहतर नींद भी ले सकेंगे और उनकी कार्यकुशलता भी बढ़ेगी। यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो के असिस्टेंट प्रफेसर सिलेन वेटर कहते हैं, दुनियाभर में करीब 80 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनका वर्क शेड्यूल उनकी बॉडी क्लॉक के हिसाब से नहीं है। लोगों के तनावग्रस्त हो जाने का यह भी एक प्रमुख कारण है।

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