दौड़ेगी ट्रेन, मिलेगी सबको बर्थ

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नई दिल्ली (खबर संसार)

देशभर में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और यात्रियों को समय पर उनके मंजिल पर पहुंचाने के लिए अत्याधुनिक सिग्नल प्रणाली स्थापित होने जा रही है। इसके लिए दुनियाभर की कंपनियों एवं विदेशी रेलवे से मंत्रणा हुई है। भारतीय रेलवे बहुत जल्द इस परियोजना पर काम शुरू कर देगा। करीब 60 हजार किलोमीटर के मुख्य नेटवर्क में विश्व की आधुनिकतम ईटीसीएस-2 प्रौद्योगिकी लगाने का काम शुरू हो जाएगा। इसके स्थापित होते ही रेलगाडियों की रफ्तार अपने आप बढ़ जाएगी। साथ ही 6-7 मिनट के अंतराल में ट्रेन दौडऩे लगेंगी। रेल मंत्रालय गंभीरता और तेजी के साथ इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। बजट के बाद रेलमंत्री पीयूष गोयल ने खास बातचीत में कहा कि रेलवे ने क्षमता विस्तार के लिए दोहरीकरण, तिहरीकरण चौथी लाइन और नई लाइनें बिछाने तथा अमान परिवर्तन के बाद अब अपने 150 साल पुराने सिलिंग सिस्टम को सिरे से बदलने की योजना बनाई है। करीब 60 हजार किलोमीटर मार्ग पर अत्याधुनिक ईटीसीएस-2 सिग्नल प्रणाली को चार से पांच साल के अंदर लगाया जाएगा। इससे लाल, पीले, हरे रंगों पर आधारित सिग्नल प्रणाली की जगह इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल प्रणाली काम करेगी और एक सेक्शन में 6-7 मिनट के अंतर पर चलाई जा सकेंगी। सिग्नल प्रणाली को बदलने के लिए रेलवे बोर्ड ने कोई वित्तीय आकलन नहीं किया है और न ही ऐसा किया जाएगा। इसकी बजाय ठेका पाने की इच्छुक अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से ही पूछा जाएगा कि वे कितनी लागत में यह काम कर सकतीं हैं। बकौल पीयूष गोयल, पूरी दुनिया में ईटीसीएस-2 सिग्नल प्रणाली करीब 60 हजार किलोमीटर लंबे ट्रैक पर लगी है, जबकि भारत में भी इतने ही लंबे ट्रैक पर इसे लगाना है। रेलवे सबसे कम लागत बताने वाली एक ही कंपनी को पूरा ठेका दे सकती है। इस तरह से रेलवे सबसे कम लागत पर इस नई सिग्नल प्रणाली को लगाया जा सकेगा। रेल मंत्रालय से जुड़े पहलुओं पर कहा कि आम बजट में सरकार ने रेल मंत्रालय के प्रस्तावों को सात प्रतिशत समर्थन दिया है। रेल नेटवर्क को सुरक्षित बनाना और क्षमता विस्तार करना मुख्य प्राथमिकता है।

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