पीएम का बजट, 2019 की चुनावी तैयारी वाला बजट

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नई दिल्ली (खबर संसार)
देश में आम चुनावों का बिगुल बजने से पहले वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बुधवार को अपने अंतिम पूर्ण बजट में गांवों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों व बुजुर्गों पर केंद्रित रखा। इसमें शहरी यानी मध्यम वर्ग के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है और आयकर स्लैब और दरों को भी बदलाव नहीं किया गया है। मौजूदा बजट का घोषणाओं को देखने के बाद ये साफ कहा जा सकता है कि आने वाले चुनावों में भाजपा अपनी शहरी पार्टी की इमेज से बाहर आकर गरीब, किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। बता दें कि साल 2019 की शुरुआत में आम चुनाव होने हैं उसकी के साथ 2018 में 4 बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। जिसमें भाजपा की सीधे प्रतिद्वंदी कांग्रेस है। भाजपा ने साथ पहले ही ये तबका नाखुश नजर आ रहा था। किसानों और गरीबों के अंदर जबरदस्त निराशा देखी जा सकती है क्योंकि 2014 में मोदी सरकार गरीबी और किसानों को बड़े वायदे देकर ही सत्ता के हासिल कर पाई लेकिन पिछले चार सालों में किसी भी तरह की कोई बड़ी योजना नजर नहीं आए। 2014 से ही ये तबका बड़ी उम्मीदों से इस सरकार की तरफ देख रहा था लेकिन कुछ खास हाथ ना लगने की वजह से नाराज चल रहा था। भाजपा को भी गुजरात चुनावों में इसकी बानगी मिल गई थी। ऐसें में मोदी सरकार का बजट पूरी तरह से गांवों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों व बुजुर्गों पर केंद्रित रहा। वहीं बजट पेश होने के बाद से ही जिस तरह से मध्यम वर्ग को नाराज किया गया और कोई बड़ी योजना नहीं दिखी। साथ ही महिलाओं को लेकर भी कुछ हासिल नहीं हुआ। इसके चलते ये बजट सबका बजट नहीं बल्कि 2019 का चुनावी बिगुल ज्यादा लगा। मोदी ने इसे नए भारत का बजट करार दिया है। 2014 में सबका साथ, सबका विकास और अच्छे दिन के नारे से सत्ता का सफर शुरू करने वाली भाजपा अब 2019 में नए भारत के एजेडें पर चुनाव मैदान में होगी। इस बजट से साफ होता है कि मोदू सरकार आगामी चुनाव किस ऐजेंडे पर लड़ेगी।

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