पॉलीथिन पर रोक और पैदा होते कई सवाल

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कालाढूंगी (खबर संसार)
मुस्तजर फारूकी
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार गुरुवार को शहर में पॉलीथिन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए तहसील प्रशासन व नगर पंचायत की टीम द्वारा अभियान चलाया गया। इस दौरान टीम ने दुकानोंए ठेलों फड़ धारकों आदि से करीब आधा किलो पॉलीथिन जब्त की। भविष्य में पॉलीथिन का प्रयोग नहीं करने की चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। गुरुवार को तहसीलदार नगर पंचायत के कर्मचारियों ने शहर में अभियान चलाकर पॉलीथिन प्रतिबंध को सफल बनाने के लिए कई दुकानों फ ड़ों ठेलों आदि से पॉलीथिन जब्त की। तहसीलदार गोपाल राम आर्या ने दुकानदारों के साथ.साथ आम जनता से भी पॉलीथिन का प्रयोग नहीं करने की अपील की। टीम में पटवारी गिरीश तिवारी गोविंद अधिकारी सुरेश बुधलकोटी इमरान खान अरुण देवरानी अजय वर्मा आदि शामिल रहे।

आखिर और पेकिंग बाली पॉलिथीन पर रोक क्यो नही
पॉलिथीन बैन किए जाने के कानून लागू होने के बाद जहां लोग हाईकोर्ट व सरकार के इस फैसले के समर्थन में इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। वही सोशल मीडिया पर इन दिनों एक एसमस खूब तेजी से वायरल हो रहा है। इस एसमस में छोटे दुकानदारों के समर्थन में बात लिखी गई है। एसएमएस में लिखा गया है कि अगर सरकार व हाइकोर्ट पॉलिथीन बैन करना ही चाहती है तो अच्छी बात है लेकिन सरकार को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि छोटे दुकानदार तो पालीथीन का प्रयोग बंद कर देंगे बंद नहीं करेंगे उनके ऊपर कठोर कानून के तहत कार्यवाही होगी। लेकिन सरकार को यह भी सोचना चाहिए कि दुकानदार तरल पदार्थ आखिर किसमें देंगे सरकार को यह भी बताना पड़ेगा। छोटे दुकानदारों द्वारा अगर पालिथिन के प्रयोग पर रोक लगा दी जाती है तो पूरे देश में जो उत्पाद छोटे से लेकर नामी गिरामी कंपनियों के आते हैं वह किस टाइप के पैक में आएंगे और अगर वह आते हैं तो क्या वह पर्यावरण के लिए खतरा नहीं है सरकार उनको नष्ट करने के लिए क्या उपाय लगाएगी। या छोटे दुकानदारों पर सरकार कार्यवाही तो करेगी इन बड़ी कम्पनियों का क्या होगा। इन कंपनियो पर सरकार व हाईकोर्ट ने बैन क्यो नही किया कुरकुरे की पैकिंग बदली जाएगी या अंकल चिप्स की या किसी और बड़ी कम्पनी की जैसे अमूल केडबरी पारले ब्रिटेनिेया
हिन्दुस्तान लिवर के शैम्पु सोप बिस्किट के प्लास्टिक रैपर नहीं चलने देंगे जी नही इसमें तो सिर्फ आम दुकानदार या गरीब रेहड़ी वाले ही पिसेंगे इस सरकारी चक्की में। इसको लागू करने से पहले कोई वैकल्पिक साधन नही सुझाया गया। कैसे कोई समोसे लेने गया व्यक्ति चटनी कपड़े के थैले में डाल के घर लाएगा ऑफिस से घर आता व्यक्ति दही को क्या अपनी जेब में डाल के लाएगा कहने का तातपर्य ये है की इस पाबन्दी से सिर्फ घरेलू दुकानदार ही तबाह होंगे । हलवाई का सबसे ज्यादा नुकसान होगा। गृह उद्योग बंद हो जाएंगे। पॉलीथिन पर पूर्णत: पाबन्दी सुन के हंसी भी आती है और गुस्सा भी उत्तराखंड सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में 15 जुलाई से पॉलिथीन बैन किए जाने के कानून लागू होने के बाद जहां लोग सरकार के इस फैसले के समर्थन में इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। वही सोशल मीडिया पर इन दिनों एक एसमेस खूब तेजी से वायरल हो रहा है। इस एसमेस में छोटे दुकानदारों के समर्थन में बात लिखी गई है। एसमेस में लिखा गया है कि अगर सरकार पॉलिथीन बैन करना ही चाहती है तो अच्छी बात है लेकिन सरकार को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि छोटे दुकानदार तो पालीथीन का प्रयोग बंद कर देंगे और बंद नहीं करेंगे तो उनके ऊपर कठोर कानून के तहत कार्यवाही होगी। लेकिन सरकार को यह भी सोचना चाहिए कि दुकानदार तरल पदार्थ आखिर किसमें देंगे सरकार को यह भी बताना पड़ेगा। छोटे दुकानदारों द्वारा अगर पालिथिन के प्रयोग पर रोक लगा दी जाती है तो पूरे देश में जो उत्पाद छोटे से लेकर नामी गिरामी कंपनियों के आते हैं वह किस टाइप के पैक में आएंगे और अगर वह आते हैं तो क्या वह पर्यावरण के लिए खतरा नहीं है सरकार उनको नष्ट करने के लिए क्या उपाय लगाएगी। या छोटे दुकानदारों पर सरकार कार्यवाही तो करेगी इन बड़ी कम्पनियों का क्या होगा। पालीथीन का इस कानून के तहत किस पॉलीथिन को हटाया जाएगा

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