नेपाल से करार चमकेंगे पिथोरागढ चम्पावत

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हल्द्वानी (खबर संसार)
अगर सबकुछ सही सही रहा तो निश्चित रूप से अपने चम्पावत पिथौरागड़ चमक जायेंगे। विदित रहे कि भारत के प्रधानमंत्री तथा पड़ोसी देश नेपाल के प्रधानमंत्री के बीच हुये करार के अनुसार चम्पावत व पिथौरागड मे कई योजनाये निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी होनी है। इन योजनाओं की समीक्षा वीसी के जरिये मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिह द्वारा राजधानी से की गई। वीसी में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा आयुक्त कुमायू मण्डल राजीव रौतेला, जिलाधिकारी चम्पावत एनएन पाण्डे जिलाधिकारी पिथौरागड सी रविशंकर, अपर आयुक्त प्रशासन संजय कुमार खेतवाल मौजूद थे। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियो के साथ ही आयुक्त कुमायू से कहा कि दोनो प्रधानमंत्रियों के बीच जिन योजनाओ की सहमति हुई है उनका निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के अन्तर्गत किया जाना है। वन विभाग से जो अनुमति आदि निर्गत होनी है उसका दोनो जिलाधिकारी प्रभावी अनुश्रवण करेें। उन्होने आयक्त कुमायू रौतेला को निर्देश दिये कि वह व्यक्तिगत तौर पर चम्पावत व पिथौरागड़ की कार्य योजनाओ का अनुश्रवण करें। आयुक्त श्री रौतेला ने मुख्य सचिव को विश्वास दिलाया कि उनके द्वारा प्रतिदिन इन महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों की समीक्षा की जायेगी और इन कार्यो को युद्वस्तर पर गति प्रदान करते हुये समयसीमा के भीतर पूरा किये जाने के प्रयास किये जायेंगे। टनकपुर बैराज से नेपाल को शारदा नदी के किनारे भारतीय क्षेत्र में बनने वाली 1.3 किमी सड़क हेतु लोनिवि पीआईयू टनकपुर द्वारा 30 हजार क्यूबिक मीटर,मिट्टी एवं आरबीएम सामग्री की मांग के सापेक्ष ऑल वेदर सड़क चैड़ीकरण के दौरान निकलने वाली लगभग 20 हजार क्यूबिक मीटर सामग्री की अनुमति 3 अगस्त को प्रदान कर दी गई है तथा शेष 11 हजार क्यूबिक मीटर सामग्री बाटनागाड़ा टनकपुर से उठान के लिए शासन को अनुमति हेतु आवेदन किया गया है। यह जानकारी जिलाधिकारी चम्पावत एसएन पाण्डे ने शुक्रवार को टनकपुर से ब्रह्मदेव नेपाल को जोडऩे वाली 1.3 किमी सड़क मार्ग के निर्माण तथा टनकपुर बैराज से नेपाल की ओर 1.2 किमी निर्मित होने वाली कैनाल परियोजना के सम्बन्ध में राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह को वीसी के माध्यम दी। मुख्य सचिव वीसी के माध्यम से भारत से नेपाल की ओर बन रहे सड़क एवं नहरों के कार्यो की समीक्षा कर रहे थे। जिलाधिकारी ने मुख्य सचिव को बताया कि सड़क निर्माण हेतु पीआईयू द्वारा लगभग 31 हजार क्यूबिक मीटर मिट्टी एवं आरबीएम की मांग की गई थी जिसमें से 20 हजार क्यूबिक मीटर सामग्री की अनुमति 3 अगस्त को दी गई है तथा शेष 11 हजार क्यूबिक मीटर सामग्री के उठान की अनुमति हेतु संशोधित प्रस्ताव तत्काल शासन को भेजने के निर्देश अधीक्षण अभियंता लोनिवि को दिये गये हैं। बाटनागाड़ा से आरबीएम उठान हेतु अनुमति शासन नोडल अधिकारी वन स्तर से अपेक्षित है। मुख्य सचिव ने लेटलतीफी पर नाखुशी व्यक्त करते हुए अपर सचिव वन को तत्काल आरबीएम उठाने हेतु कार्यदायी संस्थान को अनुमति प्रदान करने के निर्देश दिये। उन्होंने कार्यदायी संस्था पीआईयू को मिट्टी एवं आरबीएम को 10 अगस्त तक कार्य स्थल पर जमा करने के निर्देश दिये। उन्होंने मंडलायुक्त कुमाऊं को इस महत्वपूर्ण परियोजना में अनुश्रवण करने को कहा। जिलाधिकारी ने बताया कि लगभग 807 लाख की लागत से निर्मित होने वाली उक्त परियोजना निर्माण हेतु वन भूमि की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर कार्यदायी संस्था पीआईयू ठूलीगाड़ा द्वारा कार्य प्रारम्भ किया जा चुका है। परियोजना को अक्टूबर 2018 तक पूर्ण किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और परियोजना में वित्तपोषण एनएचपीसी बनबसा द्वारा किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने बताया कि टनकपुर से जौलजीबी की ओर निर्माणाधीन मार्ग के खुलेगा से सिरसा नेपाल के संयोजन हेतु काली नदी पर 400 मीटर विस्तार मोटर सेतु हेतु लोनिवि द्वारा 1145.40 लाख का आंगणन गठित कर शासन को प्रेषित किया गया है। इस सेतु के स्थल चयन हेतु लोनिवि अभियंताओं द्वारा 29 मई को नेपाल के अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण के उपरान्त सेतु निर्माण हेतु स्थान नियत कर दिया गया है तदनुसार ही आंगणन प्रेषित किया गया है जिस पर मुख्य सचिव ने धनराशि अवगत करने हेतु भारत सरकार को पत्र प्रेषित करने के निर्देश अपर सचिव वन को दिये।
टनकपुर बैराज से नेपाल को 75 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाली 1.2 किमी नहर निर्माण हेतु एनएचपीसी द्वारा मैकनिकल माइन्स से कार्य करने हेतु आवेदन किया है। जिलाधिकारी ने बताया कि उप जिलाधिकारी टनकपुर महाप्रबंधक एनएचपीसी भूवैज्ञानिक प्रभागीय वनाधिकारी लौंगिंग प्रबंधक वन विकास निगम को संयुक्त रूप से 4 अगस्त को आरबीएम एवं नॉन मैकनिकल कार्य हेतु स्थल निरीक्षण के निर्देश दिये हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि निमार्णदायी संस्था को कैनाल निर्माण हेतु 12 हेक्टेअर भूमि की आवश्यकता है जिस हेतु क्षतिपूरक वन भूमि का चयन चम्पावत में कर लिया गया है। परियोजना 18 माह में पूर्ण की जानी है जिस हेतु निविदा प्रक्रिया गतिमान है तथा वन अधिनियम के अन्तर्गत वन भूमि क्षतिपूर्ति एनएचपीसी द्वारा जमा की जायेगी।

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