2019 लोकसभा चुनाव बिना पीएम उम्मीदवार के मैदान में उतरेगा महागठबंधन

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नई दिल्ली (खबर संसार)
कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए रणनीतिक तैयारी लगभग पूरी कर ली है। भाजपा को केंद्र की सत्ता से दूर रखना पार्टी ने अपना मुख्य लक्ष्य रखा है और इसके लिए विपक्षी दलों से राज्यवार गठबंधन का फार्मूला तय किया है। बताया गया कि गठबंधन को लेकर प्रारंभिक होम वर्क कर लिया गया है। सीटों के बंटवारे पर चर्चा चल रही है। वहीं पीएम पद पर पार्टी ने अपनी दावेदारी को अलग रखते हुए चुनाव बाद इस पर फैसला लेने की रणनीति पर आगे बढने का तय किया है। कांग्रेस के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ मजबूत गठबंधन बनाने के लिए विपक्षी दलों के बीच व्यापक सहमति बन गई है। प्रधानमंत्री पद के बारे में फैसला चुनाव परिणाम आने के बाद होगा। पार्टी के शीर्ष सूत्रों ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन के लिए सपाए बसपा एवं अन्य भाजपा विरोधी दलों के बीच भी रणनीतिक समझ बन गई है। सूत्र दावा कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेशए महाराष्ट्र और बिहार में सही से गठबंधन हो गया तो भाजपा की 120 सीटें अपने आप कम हो जाएंगी और उत्तर प्रदेश में तो सत्तारूढ़ पार्टी पांच सीटों पर सिमट जाएगी। सूत्र बता रहे हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के लिए चेहरा पेश करने को लेकर कांग्रेस फिलहाल दो चरणों में काम कर रही है। पहला चरण सभी विपक्षी दलों को एक साथ लाकर भाजपा और नरेंद्र मोदी को हराने का है। दूसरा चरण चुनाव परिणाम का है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के रणनीतिकार मानते हैं कि प्रधानमंत्री पद को लेकर चुनाव से पहले बातचीत करना विभाजनकारी होगा। यही कारण है कि सीडब्ल्यूसी में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री चेहरा बनाने की घोषणा कर चुकी पार्टी को अपने इस कदम से पीछे हटना पड़ा। पार्टी सूत्रों की माने तो सारे विपक्षी दलों में ये व्यापक सहमति बन चुकी है कि सभी को मिलकर भाजपा और आरएसएस को हराना है। कांग्रेस सूत्रों ने यह भी दावा कि आगामी लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और कई अन्य राज्यों में पार्टी की लोकसभा सीटों में काफी इजाफा होगा। वहीं इसी साल होने जा रहे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में पार्टी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। इन राज्यों में नेताओं की आपसी फूट पर पार्टी मान रही है कि एक बार चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद सभी नेता एकजुट होकर पार्टी की जीत सुनिश्चित करने में अपनी पूरी ताकत लगाएंगे।

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