आखिर कैसे बना मसूद अजहर दुनिया का मोस्ट वांटेड आंतकी!

नई दिल्ली (खबर संसार)। जम्मू- कश्मीर के पुलवामा जिले में हुआ ये हमला इतना भयानक था कि इसकी गूंज घटनास्थल से २० किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। ये धमाका इतना शक्तिशाली था कि घटना में शहीद हुए जवानों के शव जम्मू- कश्मीर की उस सड़कों पर बिखरकर उसे केसरिया कर गए। हालांकि इस घटना के १२ दिन बाद भारतीय वायुसेना ने आज पाकिस्तान की सरहद में घुसकर उनके मंसूबों को नेस्तनाबूद कर दिया। पुलवामा हमले की जवाबी कार्रवाई के रुप में भारतीय वायुसेना ने आज सुबह तड़के पीओके में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के कई कैंप को राख कर दिया।
बता दें कि पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली। वही संगठन जिसका मुख्य उद्देश्य भारत से कश्मीर को अलग करना है। इसके अलावा ये संगठन विदेशों में भी आतंक फैलाने का काम करता है। इस संगठन का मास्टरमाइंड या कहे की इसका आका मौलाना मसूद अजहर है। वो मसूद जिसे खुद एक आतंकी संगठन नकार चुका था आखिर कैसे बना वो दुनिया का मोस्ट वांटेड आंतकी और कैसे की आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की हुई स्थापना। आइए आपको बताते है मसूद के एक खूंखार आतंकी बनने से लेकर जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना के सफर के बारे में।

ट्रेनिंग में हुए फेल

फ्रंटलाइन मैगजीन में छपी मसूद अजहर के बारे में ये बात वाकई चौंकाने वाली है कि उसे आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। दरअसल, मसूद अजहर ५ फुट ४ इंट के कद और थुलथुले शरीर की काठी वाला इंसान है।
हरकत-उल-मुजाहिदीन में शामिल होने का मौका तो मिला लेकिन उसके कमजोर शरीर के चलते वह अफगानिस्तान में होने वाली अपनी ४० दिन की ट्रेनिंग पूरी नहीं कर पाया। वह अफगानिस्तान में फैले जिहाद से काफी प्रभावित था और उसके लेखन की वजह से हरकत-उल-मुजाहिदीन के लीडर फजल-उल-रहमान ने उसे आतंकी संगठन की मासिक पत्रिका निकालने को कहा।

दुनिया में फैलाया जिहाद

९० के दशक का ये वो दौर था जब मसूद अजहर ने जहां मौका मिला वहां जिहाद फैलाया। एक मौका तो ऐसा भी आया जब पाकिस्तान के सबसे खतरनाक जिहादी समूहों को लीड करने वाले इस आतंकवादी को ब्रिटेन ने इस्लामिक स्कॉलर के तौर पर वीआईपी मेहमान बनाकर बुलाया था।
भारत ने ऐसे दबोचा
इस समय मसूद अजहर की उम्र महज २५ साल थी। ब्रिटेन को छोड़कर मसूद अजहर ने पुरी दुनिया में जिहाद की आग को फैलाने की कोशिश की। इसी क्रम में मसूद अजहर ने जम्मू- कश्मीर में भी अपने विचार फैलाने की कोशिश की। साल १९९४ में वो फर्जी पासपोर्ट पर भारत आया और दिल्ली के रास्ते श्रीनगर पहुंचने की भी तैयारी में था, लेकिन उससे पहले उसे भारत सरकार ने धर दबोचा और उसे पकड़कर जम्मू- कश्मीर के कोट भलवाल जेल में डाल दिया।

सुरंग बनाकर जेल से निकालने की कोशिश

मसूद अजहर को जेल से बाहर निकालने के लिए पाकिस्तानी जिहादी ग्रुप ने १९९९ में कोट भलवाल जेल में सुरंग बनाकर उसे वहां से बाहर निकालने की कोशिश भी की लेकिन मसूद अजहर के भारी शरीर के कारण वह सुंरग में जा ही नहीं पाया और उसे वापस जेल में ही आना पड़ा। यह वहीं दिन था जब मसूद अजहर ने ठाना कि वह पुलिस और सैन्य बलों पर हमला करेगा। या कहे कि कंधार प्लेन हाइजैक की रुपरेखा यहां तैयार हो चुकी थी।

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