स्तन कैंसर के अलावा भी महिलाओं को तकलीफ देते हैं यह कैंसर

जब भी महिलाओं में कैंसर की बात होती है तो सबसे पहले ब्रेस्ट कैंसर का नाम ही सामने आता है।यकीनन ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है, लेकिन इसके अतिरिक्त भी ऐसे कई तरह के कैंसर होते हैं, जो महिलाओं में देखने को मिलते हैं।

स्तन कैंसर- स्तन कैंसर महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है। ब्रेस्ट कैंसर स्तन के उत्तकों पर होता है और स्तन कैंसर होने पर महिला के स्तनों पर गांठ, स्तनों का असामान्य तरीके से बढ़ना, बगल में सूजन आना या गांठ बनना, निप्पल का आकार बदलना या उसका अंदर धसना, निप्पल से किसी तरह का डिस्चार्ज आदि लक्षण नजर आते हैं। इसलिए कहा जाता है कि अगर आपको अपने स्तनों में किसी भी तरह का बदलाव महसूस हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

ओवेरियन कैंसर

स्तन कैंसर के बाद महिला को सबसे अधिक ओवेरियन कैंसर प्रभावित करता है। इसे घातक इसलिए भी माना जाता है क्योंकि ओवेरियन कैंसर की शुरूआत में इसके लक्षणों का पता नहीं लगाया जाता और जब तक महिला का इसकी जानकारी होती है, तब तक यह एडवांस स्टेज में पहुंच चुका होता है। ओवेरियन कैंसर होने पर महिला को पेट फूलना, पेट में दबाव या दर्द, खाने में परेशानी या खाना खाने के बाद पेट का जरूरत से ज्यादा भरे होने का अहसास, पेशाब में वृद्धि, थकान, अपच, हार्टबर्न, कब्ज, पीठ में दर्द, अनियमित मासिक धर्म, संभोग के दौरान दर्द आदि परेशानी हो सकती है। इसलिए अगर आपको ऐसा कोई भी लक्षण नजर आए तो बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें।

एंडोमेटि्रयल कैंसर-गर्भाशय की अंदरूनी परत को एंडोमेटि्रयम कहते हैं। इसी एंडोमेटि्रयम की कोशिकाएं जब असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, तो ये एंडोमेटि्रयल कैंसर का कारण बनती हैं। एंडोमेटि्रयल कैंसर के कारण महिलाओं में मां बनने की क्षमता हमेशा के लिए खत्म हो सकती है। यह एक बेहद घातक कैंसर माना जाता है। इसके लक्षणों में वेजाइना से असामान्य डिस्चार्ज, पेल्विक पेन, बिना किसी कारण वजन का कम होना व बार−बार पेशा जाना मुख्य है।

गर्भाशय ग्रीवा कैंसर

गर्भाशय ग्रीवा कैंसर एक प्रकार का कैंसर है जो गर्भाशय की कोशिकाओं में होता है। बच्चेदानी का मुख गर्भाशय ग्रीवा के रूप में जाना जाता है, जो गर्भ के निचले हिस्से में होता है। गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का एक प्रमुख कारण है जो महिलाओं में मौत का कारण बनता है। इसके प्रारंभिक चरण में लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन जैसे−जैसे कोशिकाएं गर्भाशय की आसपास की कोशिकाओं को प्रभावित करना शुरू करती हैं तो इसके लक्षण नजर आते हैं। गर्भाशय ग्रीवा कैंसर होने पर महिला को पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग होना, संभोग के दौरान गंध, मासिक धर्म का लंबे समय तक होना, रजोनिवृत्ति के बाद दर्द, श्रोणि या कमर में लगातार दर्द, बार−बार पेशाब जाना और मूत्र त्याग के दौरान दर्द तथा पेल्विक पेन आदि लक्षण नजर आते हैं।

लंग कैंसर-माना जाता है कि फेफड़ों का कैंसर मुख्यतः पुरूषों को प्रभावित करता है, लेकिन महिलाएं भी इसकी चपेट में आ सकती हैं। अगर आपको बिगड़ती खांसी, सीने में दर्द, खूनी खांसी, सांस लेने में कठिनाई, घरघराहट, आवाश में कर्कश, भोजन निगलने में परेशानी, भूख में कमी, वजन घटना, थकान, फेफड़ों का संक्रमण जैसे कि निमोनिया या ब्रोंकाइटिस आदि हो तो बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें। समय रहते अगर लंग कैंसर की पहचान कर ली जाए तो इससे मुक्ति पाना संभव है।

स्किन कैंसर- स्किन कैंसर उन महिलाओं को अधिक प्रभावित करता है जो काफी देर तक सूरज के संपर्क में रहती हे। स्किन कैंसर होने पर त्वचा की सतह पर नोड्यूल, दाने या पैच आदि दिखाई दे सकते हैं। कैंसर के बढ़ने के साथ−साथ यह पैच भी धीरे−धीरे बढ़ने लग जाते हैं। इतना ही नहीं, स्किन कैंसर होने पर धूप के संपर्क में आने पर त्वचा में जलन, खुजली, बार−बार एक्जीमा होना आदि लक्षण नजर आते हैं।

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