भारतीय पायलट को पाकिस्तान से वापस देश बुलाने की तैयारी!

नई दिल्ली (खबर संसार) भारत की तरफ से आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई से पाकिस्तान में डर के साथ-साथ बौखलाहट भी देखने को मिल रही है। इसी के चलते 27 फरवरी को पाकिस्तान का लड़ाकू विमान एफ-16 भारतीय सीमा में दाखिल हुआ लेकिन इस पर भारतीय वायुसेना ने एकदम कार्रवाई करते हुए उस विमान को मार गिराया। इन सब में हमारा एक मिग विमान हादसे का शिकार हो गया जो भारतीय पायलट अभिनंनद के संचालन में था। इस हादसे में भारतीय पायलट पाकिस्तान में चला गया है। अब भारतीय पायलट को पाकिस्तान से वापस देश बुलाने की तैयारी की जा रही है।

इसमें एक ही संंधि है जो भारतीय पायलट को सही-सलामत देश वापसी करवा सकता है। इस संधि में युद्ध बंदियों का सरंक्षण (पीओडब्ल्यू) करने वाले नियम विशिष्ट हैं। इन्हें पहले 1929 में जिनेवा संधि के जरिए ब्यौरे वार किया गया था और द्वितीय विश्व युद्ध से सबक सीखते हुए 1949 में तीसरी जिनेवा संधि में उनमें संशोधन किया गया था। जंगी कैदी का संरक्षण का दर्जा अंतरराट्रीय सशस्त्र संघर्षों में ही लागू होता है।

क्या कहते हैं नियम

युद्ध बंदी वह होते हैं जो संघर्ष के दौरान आमतौर पर किसी एक पक्ष के सशस्त्र बलों के सदस्य होते हैं जिन्हें प्रतिद्वंद्वी पक्ष अपनी हिरासत में ले लेता है।
पीओडब्ल्यू को युद्ध कार्य में सीधा हिस्सा लेने के लिए उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है।
उनकी हिरासत शक के तौर पर नहीं होती है बल्कि इसका मकसद संघर्ष में उन्हें फिर से हिस्सा लेने से रोकना होता है।
युद्ध खत्म होने के बाद उन्हें रिहा किया जाना चाहिए और बिना किसी देरी के वतन वापस भेजना चाहिए।
हिरासत में लेने वाली शक्ति उनके खिलाफ संभावित युद्ध अपराध के लिए मुकदमा चला सकती है लेकिन हिंसा की कार्रवाई के लिए नहीं जो अंतरराट्रीय मानवीय कानूनों के तहत विधिपूर्ण है।
नियम साफतौर पर कहते हैं कि जंगी कैदियों के साथ हर परिस्थिति में मानवीय तरीके से सलूक किया जाना चाहिए।

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