बॉडी सम्भलती नहीं, गाड़ी कहां से सम्भालेंगे: पुलिस महानिदेशक

हल्द्वानी, खबर संसार। नशे व यातायात को लेकर जनता, प्रतिनिधि, एनजीओ को लेकर आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (काूनन एवं शांति व्यवस्था) अशोक कुमार से लेकर, डीआईजी, एसएसपी, सभी ने अपने अपने विचार रखें।

पुलिस महानिदेशक का कहना था कि नशे की शुरूआत साथ मजे के साथ होती है और धीरे-धीरे आदत में तबदील हो जाती है। किसी भी ड्रग लेने वाले छात्र-छात्रा की दुर्गती तो होती ही है उसका परिवार भी इस दुर्दशा का शिकार बनता है। नशेड़ी ऐसा कोढ़ बन जाता है कि वह घर के पैसे चुराकर नशे के कारोबारियों तक पहुंचाता है।

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जब छात्र-छात्रा इस प्रयास में विफल होते है तो वे तरह-तरह के स्कैंडल करने लग जाते है। माना जा रहा है कि ड्रग्स दुनिया का दूसरे नम्बर का आर्गनाइज्ड क्राइम है। क्योंकि अपने देश से निकलने या तस्करी के बाद इसकी कीमत विदेशों में करोड़ा में हो जाती है।

यातायात पर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि राज्य बनने से पहले चार लाख वाहन थे। आज 28 लाख है। तो यातायात बिगड़ेगा ही। क्योंकि उस अनुपात में उत्तराखंड में सडक़ें नहीं बनी है। उन्होंने सिंगापुर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पर एक गाड़ी की कीमत दस लाख है तो उसका रजिस्ट्रेशन तीस लाख का होता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस सीपीयू हेलमेट के पीछे बेवजह दौड़ती फिरती है। जबकि हर व्यक्ति को खुद ही हेलमेट पहनना चाहिए, क्योंकि वह उसकी सुरक्षा के लिए है। डीजी ने शराबी वाहन चालकों पर कटाछ करते हुए कहा कि बॉडी सम्भलती नहीं, गाड़ी कहा से सम्भालेंगे।

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