चौथी भिडंत में तीन बार मुंबई जीता

नई दिल्ली (खबर संसार)। रविवार को यहां चेन्नई सुपरकिंग्स को एक रन से हराकर चौथी बार आईपीएल चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। चेन्नई के सामने 150 रन का लक्ष्य था लेकिन उसकी टीम शेन वाटसन के 59 गेंदों पर 80 रन के बावजूद सात विकेट पर 148 रन ही बना पायी। चेन्नई को आखिरी ओवर में नौ रन चाहिए थे लेकिन इसमें उसने वाटसन का विकेट गंवा दिया। मैच का परिणाम अंतिम गेंद पर निकला जिसमें चेन्नई को दो रन की दरकार थी लेकिन मलिंगा ने यार्कर पर शार्दुल ठाकुर को पगबाधा आउट कर दिया।

इससे पहले मुंबई की टीम नियमित अंतराल में विकेट गंवाने के कारण किंवटन डिकाक (17 गेंदों पर चार छक्कों की मदद से 29) से मिली अच्छी शुरुआत और कीरेन पोलार्ड (25 गेंदों पर नाबाद 41) के उपयोगी योगदान देने के बावजूद आठ विकेट पर 149 रन ही बना पाया।

चौथी भिडंत में तीन बार मुंबई जीता

मुंबई और चेन्नई के बीच यह चौथा फाइनल था जिसमें मुंबई तीन बार चैंपियन बना है। इन दोनों टीमों के बीच हमेशा पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम जीती है और इस बार भी यह क्रम जारी रहा। शायद यही सोचकर रोहित शर्मा ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। मुंबई ने इससे पहले 2013, 2015 और 2017 में खिताब जीते थे और इस तरह से उसने एक साल छोड़कर खिताब जीतने का क्रम जारी रखा। उसने 2013 और 2015 के फाइनल में भी चेन्नई को हराया था। रोहित शर्मा ने कप्तान के रूप में चौथा खिताब भी जीता। मुंबई की जीत में उसके गेंदबाजों ने अहम भूमिका निभायी। बुमराह और चाहर ने अपने कोटे के चार चार ओवरों में 14-14 रन दिये और क्रमश: दो और एक विकेट हासिल किया। मिशेल मैकलेनगन ने भी चार ओवर में 24 रन दिये।

मुंबई की खराब फील्डिंग

मुंबई का क्षेत्ररक्षण हालांकि अच्छा नहीं रहा। अकेले वाटसन को ही तीन जीवनदान मिले। इससे पहले दीपक चाहर ने मुंबई को बड़ा स्कोर नहीं बनाने दिया था। उन्होंने 26 रन देकर तीन विकेट लेने में सफल रहे। उनके अलावा इमरान ताहिर (23 रन देकर दो) और ठाकुर (37 रन देकर दो) ने भी अच्छी गेंदबाजी की। मुंबई की तरह चेन्नई का शीर्ष क्रम भी लड?ड़ा गया। फाफ डुप्लेसिस (13 गेंदों पर 26 रन) ने जिस तरह से चौथे ओवर में क्रुणाल पंड्या की तीन गेंदों पर दो चौके और एक छक्का लगाया उससे मुंबई के समर्थक बैचेन थे लेकिन दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज ने इसी ओवर में अति उत्साही शॉट लगाने के प्रयास में अपना विकेट इनाम में दे दिया। वाटसन ने जमने में ज्यादा समय नहीं लगाया और मलिंगा पर दो चौके और छक्का जड़कर हाथ खोले, लेकिन दूसरे छोर से विकेट गिरने से वह धीमे पड़ गये। सुरेश रैना (14 गेंदों पर आठ रन) पहली बार डीआरएस के सहारे टिके रहे लेकिन राहुल चाहर की पगबाधा की अपील पर रिव्यू उनके काम नहीं आया। बुमराह ने नये बल्लेबाज अंबाती रायुडु (एक) को आते ही विकेट के पीछे कैच करवा दिया लेकिन र्टिनंग प्वाइंट तब आया जब महेंद्र सिंह धोनी (आठ गेंदों पर दो रन) ओवरथ्रो पर दूसरा रन लेने के प्रयास में रन आउट हो गये। धोनी को आउट देने के लिये तीसरे अंपायर को कई कोण से रीप्ले देखना पड़ा।

ऐसे बदला मैच का रुख

पंद्रह ओवर के बाद चेन्नई चार विकेट पर 88 रन बनाकर संघर्ष कर रहा था। ऐसे मौके पर ड्वेन ब्रावो (15) ने मलिंगा के अगले ओवर में छक्का जबकि वाटसन ने तीन चौके लगाये। चेन्नई को जब 18 गेंदों पर 38 रन की दरकार थी तब इस आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने क्रुणाल पर लगातार तीन छक्के लगाये। लेकिन बुमराह ने ब्रावो को आउट करके मैच में फिर रोमांच भर दिया और मलिंगा आखिरी ओवर में नौ रन का बचाव करने में सफल रहे। इससे पहले डिकाक ने दीपक चाहर के दूसरे ओवर में तीन छक्कों की मदद से 20 रन बटोरे थे लेकिन इस तेज गेंदबाज ने बाकी तीन ओवर में केवल छह रन दिये। इनमें पारी का 19वां ओवर में भी शामिल है जिसमें उन्होंने चार रन दिये।

तेज शुरुआत के बाद मुंबई का संघर्ष

मुंबई को पहले छह ओवर में रोहित शर्मा (14 गेंदों पर 15 रन) और डिकाक के विकेट गंवाये। शार्दुल ने डिकाक को जबकि दीपक चाहर ने रोहित को धोनी के हाथों कैच कराया। धोनी का यह आईपीएल में विकेटकीपर के रूप में 132वां शिकार था जो कि रिकार्ड है। चाहर का यह ओवर मेडन रहा जिससे छह ओवर के बाद मुंबई का स्कोर दो विकेट पर 45 रन हो गया। सूर्यकुमार यादव (17 गेंदों पर 15) और इशान किशन (26 गेंदों पर 23) ने विकेट बचाने को तरजीह दी। बीच में चार ओवर में केवल 13 रन बने।

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