सरकारी स्कूलों की हालत के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ही सरकारें जिम्मेदार

देहरादून(खबर संसार)।  हाईस्कूल के 21 टॉप-10 मेधावियों में 18 और इंटर मीडिएट के 12 टॉप-10 मेधावियों में सात विद्या मंदिरों के हैं। सरकारी स्कूल इस बार भी पिछड़ गए हैं। लेकिन, सरकारी स्कूलों की इस हालत के के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ही सरकारें जिम्मेदार हैं।

पिछले कई साल से राज्य की सरकारें न तो स्कूलों को पर्याप्त शिक्षक ही दे पाए हैं। सैकड़ों स्कूलों में हेडमास्टर और प्रिंसीपल तक नहीं है।

1.लापरवाह सरकार

राज्य में इस वक्त सरकारी माध्यमिक स्कूलों में की संख्या 2200 के करीब है। इनमें पिछले कई साल से तीन हजार 89 पद एलटी के और चार हजार 509 पद प्रवक्ता के खाली हैं। शिक्षकों की स्थायी भर्ती के बजाए सरकार अतिथि शिक्षकों पर फोकस रहा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जाकर यह व्यवस्था खत्म हुई। इसी प्रकार करीब एक हजार पद हेडमास्टर और प्रिंसीपल के भी लंबे समय से खाली हैं। कामचलाऊ व्यवस्था से स्कूलों को चलाया जा रहा है।
2. शिक्षक भी गुनहगार
सरकारी स्कूलों की इस दशा के लिए शिक्षक भी कम गुनहगार नहीँ। सरकारी स्कूलों में आए दिन होने वाले विरोध-आंदोलनों में शिक्षकों का फोकस केवत लबादला,प्रमोशन, वेतन विसंगति, छुट्टियों पर ही रहता है। पिछले पांच साल में एक बार भी कोई शिक्षक आंदोलन ऐसा नहीं हुआ, जिसमें शिक्षकों ने शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए आवाज उठाई हो। कभी ऐसा आंदोलन नहीं हुआ जिसमें सरकार पर शिक्षक के रिक्त पद भरने क मांग की गई हो।

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