तो क्या धोनी के ग़लत फैसले से छिनी चेन्नई सुपरकिंग्स के हाथ आई ट्रॉफ़ी?

मुबई (खबर संसार)। आईपीएल-12 का फ़ाइनल जो मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेला गया वह इतना रोमांचक था मुंबई इंडियंस ने चेन्नई सुपर किंग्स को आख़िरी गेंद तक नाको चने चबवाने के बाद आख़िरकार केवल एक रन से मात दी।

यह आख़िरी गेंद थी मुंबई के सबसे अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ लसिथ मलिंगा की, उनके सामने थे चेन्नई के शार्दुल ठाकुर। हालांकि जीत के लिए 150 रनों की तलाश में शार्दुल ठाकुर जब मैदान में उतरे तो टीम को दो गेंद पर केवल चार रनों की ज़रूरत थी। मलिंगा की पहली गेंद पर शार्दुल ठाकुर ने दो रन भी बनाए, लेकिन अगली और आख़िरी गेंद पर वह मलिंगा के शानदार ऑफ़ कटर का शिकार हो गए।

गेंद मिडिल स्टंप के ठीक सामने खड़े शार्दुल ठाकुर के पैड पर जाकर रुकी और अंपायर ने शार्दुल को आउट करार दिया। इसके साथ ही मुंबई फाइन मैच जीत गई। वहीं दूसरी तरफ़ चेन्नई के ख़ेमें में मायूसी छा गई। पैड बांधे हाथ में बैट लिए हरभजन सिंह ग़ुस्से में उठे लेकिन यही समां बता रहा था कि क्या अपने अनोखे निर्णय के दम पर मैच के नतीजे बदलने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने शार्दुल ठाकुर को अंतिम समय में मैदान में भेजकर ग़लती की।

क्रिकेट समीक्षक मानते हैं कि वाकई धोनी ने बहुत बड़ी ग़लती कर दी शार्दुल ठाकुर के मुक़ाबले हरभजन सिंह चौके-छक्के लगाने के लिए अधिक जाने जाते हैं। वहीं एक समीक्षक का मानना है कि शायद प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शार्दुल ठाकुर की बल्लेबाज़ी को ध्यान में रखकर धोनी ने यह निर्णय लिया।

अब धोनी ने जो निर्णय लिया सो लिया लेकिन हरभजन सिंह के पास हर हाल में शार्दुल ठाकुर से अधिक अनुभव था। समीक्षक कहते हैं कि हरभजन सिंह के पास दबाव सहने की ताक़त भी अधिक थी। लेकिन वह यह भी मानते हैं कि धोनी ने शायद यह सोचा होगा कि शार्दुल ठाकुर हरभजन सिंह के मुक़ाबले रविंद्र जडेजा के साथ एक या दो रन अधिक तेज़ी से ले सकते हैं क्योंकि वह युवा हैं। इसके अलावा कोई और कारण समझ में नहीं आता। जो भी हो लगभग जीती बाज़ी हारने से बड़ी निराशा टीम चेन्नई और कप्तान धोनी के लिए नहीं हो सकती।

इसके अलावा चेन्नई को जीत के दरवाज़े पर लगभग पहुंचाने के बाद सलामी बल्लेबाज़ शेन वॉटसन जिस तरह से रन आउट हुए वह भी चेन्नई की हार की सबसे बड़ी वजह रही। शेन वॉटसन ने पिछली बार साल 2018 में हैदराबाद के ख़िलाफ़ नाबाद शतक जमाकर अकेले दम पर चेन्नई को तीसरी बार चैंपियन बना दिया था।

अब मुंबई की जीत के बाद कहा जा सकता है कि युवा मुंबई ने बूढ़े शेरों को मात दी लेकिन याद रखना चाहिए कि इन्हीं बूढ़े शेरों ने आख़िरी गेंद तक युवा टीम के साथ संघर्ष किया और केवल एक गेंद से हारे।

अब इसे भी इत्तेफ़ाक़ ही कहा जाएगा कि आख़िरी ओवर से पहले अपने पिछले ही ओवर में जो पारी का 16वां ओवर था उसमें 20 रन खाने वाले 35 साल के लसिथ मलिंगा ने ही मुंबई को जीत दिलाई। अब वह भी तो मुंबई के बूढ़े शेर ही हैं।

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