सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम मामले में चुनाव आयोग को भेजा नोटिस

नई दिल्ली (खबर संसार)। लोकसभा चुनाव जोरों पर है। ऐसे में विपक्षी पार्टियां हर संभव तरकीबों को अपनाने से पीछे नहीं हटेंगी। ईवीएम मशीन का मुद्दा हमेशा से गरमाया रहता है। लेकिन इस बार विपक्षी पार्टियां ईवीएम को लेकर नहीं बल्कि वीवीपैट को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई।  21 विपक्षी दलों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ईवीएम और वीवीपैट  में से 50 प्रतिशत परिणामों के मिलान को लेकर निरीक्षण करने की मांग की थी।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इसपर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी। साथ ही मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने चुनाव आयोग को अदालत की सहायता के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी की प्रतिनियुक्ति करने के लिए भी कहा है।

इस याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत ने इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण के 1975 के फैसले में कहा था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संविधान की मूल संरचना का एक हिस्सा थे।सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाकर्ताओं में तेलगु देशम पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी सहित विपक्षी 21 दलों की पार्टी शामिल थी। याचिका में पार्टियों की तरफ से मांग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग को निर्देश दे कि कुल इस्तेमाल की जा रही ईवीएम में 50 प्रतिशत दर्ज मतों का वीवीपैट में मौजूद पर्चियों से मिलान करे।

इससे पहले भी इन दलों ने मांग की थी

इससे पहले भी इन दलों ने गत माह 5 फरवरी को चुनाव आयोग से यह मांग की थी, लेकिन आयोग ने आदेश देने से इन्कार कर दिया था। आयोग ने कहा था कि इस संबंध में मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। और इस बारे में भारतीय सांख्यिकी संस्थान से राय ली जा रही है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।

आयोग ने यह भी बाताया था कि चुनावों में फिलहाल एक विधानसभा सीट पर एक ईवीएम के मतों का वीवीपैट पर्चियों से मिलान किया जाता है।याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव, एनसीपी के वरिष्ठ नेता शरद पवार, तृणमूल के डेरेक ओ. ब्रायन, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूख अब्दुल्ला, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा, बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा आदि शामिल हैं।

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