नैनीताल सीट पर जीत का गणित कुछ इस तरह से है

हल्द्वानी (खबर संसार)। प्रदेश में 11 अप्रैल को मतदान होने के साथ ही यहां से चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों के अपने चुनावी रथ के पहिए थम चुके हैं। आगामी 23 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने तक रथों के पहिये थमे रहेंगे, परिणाम के बाद किसका रथ विजयघोष करते हुए दौड़ेगा यह बात तो चुनावी स्ट्रांग रूम से 23 मई को ही बाहर निकलकर आएगी।

फिलहाल कुछ नेता ऐसे हैं जो अपनी हार-जीत का अंतर कार्यकर्ताओं के फीड बैक के आधार पर समझ रहे हैं। कुछ नेता जिन्हें पता है कि उन्हें चुनाव नहीं जीतना है, वह केवल इस बात पर फीड बैक ले रहे हैं कि उन्हें कितने वोट पड़ सकते हैं। यानि अपनी जीत का नेताओं के पास अपना गणित है।

नैनीताल-ऊधमसिंहनगर सीट की बात करें तो यहां मुकाबला सीधे-सीधे हरीश रावत बनाम अजय भट्ट ही है। चुनाव में कांग्रेसियों ने इस चुनाव को हरीश रावत बनाम नरेंद्र मोदी का रूप दिया। अब देखना यह है कि ऊंट किस करवट बैठता है। चुनाव के बाद अब तक के रुझानों में लोग यहां मुकाबला कांटे का बता रहे हैं। हालांकि ज्यादातर लोग जीत के लिए दांव भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट पर ही लगा रहे हैं।

मगर हरीश रावत को कमतर आंकने को भी लोग तैयार नहीं हैं। दरअसल यह चुनाव हरीश रावत ने बिना किसी स्टार प्रचारक अकेले ही अपने दम पर कार्यकर्ताओं के सहयोग से लड़ा है। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का कहना था कि हरीश रावत ही अकेले ऐसा नेता थे जिन्हें चुनाव कार्यकर्ताओं ने लड़ाया।

पिछले दिनों चुनाव प्रचार के दौरान एक कांग्रेसी नेता का खबर संसार से सवाल था, कांग्रेस की चुनाव में क्या स्थिति है? इस सवाल पर एक और सवाल था, एक कांग्रेसी होने के नाते क्या आप हरीश रावत को मन से चुनाव लड़ा रहे हैं या फिर केवल यह दिखाने के लिए कि हम कांग्रेसी हैं और प्रचार करना हमारी मजबूरी? इस पर कांग्रेसी का जवाब था कि केवल वह ही नहीं बल्कि कांग्रेस का हर कार्यकर्ता हरीश रावत को मन से चुनाव लड़ा रहा है।

उनकी गैर मौजूदगी में भी कार्यकर्ताओं में इतना जोश है कि वह अपने दम पर अलग-अलग स्थानों पर नुक्कड़ सभाएं कर हरीश रावत के लिए वोट मांग रहे हैं। यानि कांग्रेस कार्यकर्ता का इशारा साफ था कि कार्यकर्ता हरीश रावत के साथ पूरी मेहनत से चुनाव लड़ रहा है, और यही कांग्रेसियों का सबसे बड़ा विश्वास भी है। यह बात भी साफ थी कि हरीश रावत के साथ चुनाव प्रचार के लिए कोई भी स्टार प्रचारक इस लोकसभा सीट में नहीं पहुंचा। कांग्रेस हाईकमान का जोर नैनीताल सीट पर कम अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ सीट पर ज्यादा था।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि तराई में हरीश रावत का मजबूत आधार है, वहां से उन्हें खासी संख्या में लीड मिलने जा रही है। इसके साथ ही पहाड़ से उनका जुड़ाव और यहां भी अच्छा आधार उनके पक्ष में बताया जा रहा है। कांग्रेसियों का मानना है कि कांग्रेस का पारंपरिक वोट तो हरीश रावत के साथ है ही, उनकी खुद की इमेज और आधार भी उनकी जीत का आधार बनने जा रहा है।

भाजपा के लिए मोदी फैक्टर

भाजपा की बात करें तो भाजपा के लिए मोदी फैक्टर ही सबसे बड़ा फैक्टर बनने जा रहा है।भाजपाइयों का मानना है कि पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार तमाम ऐसी बातें हैं जो मोदी लहर को और मजबूत बना रही हैं। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक तो सरकार के खाते में हैं ही, केंद्र सरकार की चलाई गई तमाम योजनाएं भी आम आदमी से सीधे जुड़ी हैं। उनका मानना है कि जिस तरह नरेंद्र मोदी के डर से सारा विपक्ष एक हो गया, उससे साफ है कि आम जनमानस के मन में यह बात घर कर गई कि मोदी ही ऐसे नेता हैं जिनके किसी भी मुद्दे पर त्वरित निर्णय की उम्मीद की जा सकती है। नैनीताल लोकसभा सीट पर भाजपाइयों को लगता है कि उन्हें सबसे ज्यादा लीड कालाढूंगी विधानसभा सीट से मिलेगी। यह सीट भाजपा विधायक बंशीधर भगत का गढ़ है और यहीं से भाजपा को सबसे ज्यादा लीड की उम्मीद है।
-मनोज आर्य

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