खबर संसार, नई दिल्ली: अफगानिस्तान को लेकर कहां चूक गया भारत, क्या है foreign policy, अफगानिस्तान में तालिबानों को लेकर पूरी दुनिया में शोर मचा हुआ है। लेकिन अफगानिस्तान को लेकर तालिबान पर भारत का रूख साफ नजर नहीं हो सका है। और न ही भारत ने तालिबान पर कोई आधिकारिक बयान भी जारी किया है। भारत की foreign policy, काफी असमंजस की स्थिति में दिखाई दे रही है। भारत सरकार अफगानिस्तान मामले पर फूंक-फूंककर कदम रख रही है।
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foreign policy में बदलवा जरूरी
अटल बिहारी सरकार में बतौर पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा का कहना है कि अफगानिस्तान के मुद्दे पर भारत के सामने सिस्टम एंड वॉच के अलावा कोई रास्ता भी नहीं बचा है, भारत ने अफगानिस्तान में काफी काम किया है। वहां के लोग भारत को काफी अच्छा मानते हैं। लेकिन भारत अफगानिस्तान में कही नजर नहीं आ रहा है। इसलिए भारत को अपनी foreign policy में बदलवा करना चाहिए।
92 वर्षीय पूर्व विदेश मंत्री कुंवर नटवरसिंह ने अफगानिस्तान के मौजूदा हालात को लेकर कहा कि भारत सरकार को तालिबान के कब्जा करने से पहले ही उसके साथ खुले तौर पर संपर्क स्थापित करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अगर तालिबान अफगानिस्तान में एक जिम्मेदार सरकार की तरह काम करता है तो फिर भारत को उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने चाहिए।
रूस से हमारे संबंध हुए खराब
पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा का कहना है कि अफगानिस्तान के मुद्दे पर रुस, चीन और पाकिस्तान एक साथ नजर आ रहे है। भारत की foreign policy से रूस विगत कई वर्षों से भारत का बहुत अच्छ मित्र देश रहा है। मगर अफसोस की बात है कि हम अमेरिका के इतने निकट जाने की कोशिश करते रहे, कि रूस के साथ हमारे जो बेहतर संबंध थे वह भी खराब हो गए। अब रुस, चीन और अब पाकिस्तान की तिकड़ी अफगानिस्तान में सक्रिय हैं और भारत कहीं भी नजर नहीं आ रहा है।
