Uttarakhand

महिलाओं का Character उसके परिधान से तय नहीं होता

हल्‍दवानी, खबर संसार। कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति के चरित्र (Character) के बारे में अगर आप जानना चाहते हैं तो उसके दो ही तरीके हैं, एक वो महिलाओं के प्रति क्या विचार रखता है और दूसरा वो अपने से छोटों से कैसा व्यवहार करता है…

इसमें पहला यानी महिलाओं के संदर्भ में अगर बात करें तो उनके प्रति किसी पुरुष के कैसे विचार हैं ये उसका स्वयं का चरित्र (Character) दर्शाता है। अब यदि वो महिलाओं के परिधानों को लेकर किसी भी तरह की टिप्पणी करता है और उससे उनके चरित्र (Character) का खाका खींचता है, तो यक़ीन मानिए ये खुद उसके नज़रिए और चरित्र की निम्नता को दर्शाता है और उन्हें मनोचिकित्सक की सख़्त आवश्यकता है।

आज की महिलाए ताकतवर

आज की महिलायें ताक़तवर हैं और जागरूक हैं साथ ही वे भलि भांति जानती हैं कि उनके लिए क्या सही है और क्या नहीं।
वैसे भी जिनको पैदा होने पर डायपर पहनाने से लेकर नाड़ा बांधने, या क़मीज़ के बटन लगाने हों, या फिर जूते के फीते ही क्यों न बांधने हों, सभी कुछ उसे किसी महिला ने सिखाया हो उसे कोई अधिकार नहीं कि वो महिलाओं का चरित्र (Character) उसके परिधान से तय करे और अगर कोई ऐसा कर रहा है तो उसे अपने मानसिक स्वास्थ्य की चिंता करनी चाहिए।

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