HomeUttar Pradesh6 करोड़ साल पुरानी शालिग्राम चट्टानें अयोध्या पहुंची, बनेंगी राम की मूर्ति

6 करोड़ साल पुरानी शालिग्राम चट्टानें अयोध्या पहुंची, बनेंगी राम की मूर्ति

भारत-नेपाल के सदियों से चले आ रहे श्रद्धा-आस्था के रिश्ते कभी कम नहीं होंगे। रिश्ते खराब करने की चीन की कोशिश जारी है, इसके बीच नेपाल ने अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर के रामलला के बाल स्वरूप और सीतामाता की मूर्ति बनाने के लिए पवित्र काली गंडकी नदी से निकलने वाले शालीग्राम की बड़ी शिलाएं भेजी हैं।

जो अब अयोध्या में पहुंच गयी हैं। नेपाल से दो दुर्लभ 60 मिलियन वर्ष पुरानी शालिग्राम चट्टानें अयोध्या पहुंचीं हैं और अब इन दोनों शालिग्राम शिलाओं से भगवान राम की मूर्ति तराश कर अयोध्या में राम मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित की जाएगी। नेपाल के जानकी मंदिर के निवासियों ने इस राम मंदिर में लगने वाली भगवान राम की मूर्ति के लिए धनुष भी भेजा है।

नेपालवासियों के राम मंदिर के लिए दिये जा रहे इस सहयोग से भारत और नेपाल के प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक रिश्ते और मजबूत और सुदृढ़ होंगे। किसी दूसरी शक्ति (चीन) के हथकंड़े आस्था के इन रिश्तों को कमजोर नही कर सकते। ये शालिग्राम शिलाएं- जो 6 करोड़ साल पुरानी बताई जाती हैं- नेपाल से दो अलग-अलग ट्रकों पर अयोध्या पहुंचीं। जहां एक चट्टान का वजन कथित तौर पर 26 टन है, वहीं दूसरी का वजन 14 टन है।

पुजारियों और स्थानीय लोगों द्वारा पवित्र पत्थरों का स्वागत किया गया

हिंदू भगवान भगवान राम के जन्मस्थान पर पुजारियों और स्थानीय लोगों द्वारा पवित्र पत्थरों का स्वागत किया गया, जिन्होंने शिलाखंडों को मालाओं से सजाया और उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपने से पहले अनुष्ठान की पेशकश की। अधिकारियों ने कहा कि इस पत्थर से उकेरी गई भगवान राम की बाल रूप में मूर्ति को राम मंदिर के गर्भगृह में रखा जाएगा, जिसके अगले साल जनवरी में मकर संक्रांति त्योहार तक तैयार होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि दो चट्टानें नेपाल के मुस्तांग जिले में सालिग्राम या मुक्तिनाथ (मोक्ष का स्थान) के पास गंडकी नदी में मिली हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया नेपाल में काली गंडकी नाम का एक झरना है। यह दामोदर कुंड से निकलता है और गणेश्वर धाम गंडकी से लगभग 85 किमी उत्तर में है। ये दोनों शिलाखंड वहीं से लाए गए हैं। यह स्थान समुद्र तल से 6,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बन रहा है। इस मंदिर के निर्माण के कार्य जारी हैं। मंदिर के लिए देश के अंदर ही धन संग्रह का बड़ा अभियान चला। देशवासियों ने दोनों हाथों की अंजुरी भरकर मंदिर के लिए दान दिया। देश से ही इतना धन और सोना−चांदी एकत्र हो गया कि बाहरी सहयोग की जरूरत ही नहीं पड़ी। धीरे-धीरे मंदिर अपना स्वरूप लेने लगा है। दुनिया भर के हिंदू धर्मावलंबी भव्य मंदिर को बनता देख कर गौरव महसूस कर रहे हैं। सबकी इससे आस्थाएं जुड़ी हैं। वे इसमें सहयोग करना चाहते हैं।

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