केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि भारत अब पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को बहाल नहीं करेगा। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि छह दशक पुरानी यह संधि अब भारत के हित में नहीं है और इसे फिर से शुरू करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा, “अब हम पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी को मोड़कर राजस्थान लाएंगे। पाकिस्तान को अनुचित रूप से जो पानी मिल रहा था, वह अब नहीं मिलेगा।”
1960 में हुई थी संधि, अब बंद
सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित हुई थी, जिसका उद्देश्य सिंधु नदी प्रणाली का जल विभाजन करना था। लेकिन 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक बड़े आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने इस संधि को “स्थगित” कर दिया था। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी, जिसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया। भारत ने पाकिस्तान पर लगातार सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया है।
पाकिस्तान की अपील को भारत ने किया नजरअंदाज
हमले के बाद इस्लामाबाद लगातार भारत से संधि बहाली की अपील करता रहा है। पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तज़ा ने भारत के जल शक्ति मंत्रालय को कम से कम चार पत्र लिखे हैं। इनमें तीन पत्र ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भेजे गए, जिनमें भारत से संधि को बहाल करने की अपील की गई है। लेकिन भारत ने इन अनुरोधों को अब तक नजरअंदाज किया है।
सीमा पर तनाव के बीच कोई समझौता नहीं
हाल के वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमाओं पर कई बार तनावपूर्ण स्थितियां बनी हैं। दोनों देश परमाणु संपन्न हैं और युद्धविराम समझौते के बावजूद रिश्तों में तनाव बना हुआ है। ऐसे हालात में सिंधु जल संधि का निलंबन एक बड़ा कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।
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