भारत की प्रमुख तेल कंपनी नायरा एनर्जी वैश्विक प्रतिबंधों की चपेट में आ गई है। यूरोपीय संघ द्वारा 18 जुलाई को जारी किए गए नए प्रतिबंधों की सूची में कंपनी को भी शामिल किया गया, जिसके कारण तीन तेल टैंकर अपने माल का डिस्चार्ज नहीं कर पा रहे हैं।
टैंकरों की स्थिति गंभीर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार,
- एलोरा टैंकर 60 हजार मैट्रिक टन जेट ईंधन लेकर पुर्तगाल के साइनस बंदरगाह पर 18 जुलाई से लंगर डाले खड़ा है।
- एमजेनिश टैंकर वाडीनार से 40 हजार टन डीजल लेकर मलेशिया रवाना हुआ था, लेकिन अब मलक्का जलडमरूमध्य में खड़ा है।
- पैसेफिक मार्टिना टैंकर ओमान की खाड़ी में बिना खरीदार के घूम रहा है।
क्यों बनी यह स्थिति?
नायरा एनर्जी में रूस की कंपनी रॉसनेफ्ट की हिस्सेदारी है, जिसके चलते ईयू ने इसे प्रतिबंधित कंपनियों में शामिल किया। इससे यूरोपीय कंपनियों और तेल निरीक्षकों ने नायरा के उत्पादों से किनारा कर लिया, भले ही भुगतान हो चुका हो।
Nayara की भारत में स्थिति
नायरा एनर्जी, जिसे पहले एस्सार ऑयल के नाम से जाना जाता था, गुजरात के वाडीनार में 2 करोड़ टन की रिफाइनरी संचालित करती है। इसके देशभर में 6,800 से अधिक फ्यूल आउटलेट हैं और यह भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता का 8% संभालती है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल
यूरोपीय संघ का दावा है कि नायरा रूसी क्रूड का इस्तेमाल करती है, जबकि हकीकत यह है कि कंपनी केवल भारत की घरेलू जरूरतों के लिए तेल आयात करती है। ईयू की यह कार्रवाई भारत की ऊर्जा सुरक्षा को कोलैटरल डैमेज की तरह ट्रीट करने जैसा है।
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