Sunday, February 1, 2026
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केंद्रीय बजट और भारत की विदेश नीति: किन देशों को मिला फायदा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट पेश किया। यह बजट केवल देश की आर्थिक दिशा तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय प्रभाव को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है। हर वर्ष विदेश मंत्रालय (MEA) के अंतर्गत किए जाने वाले बजटीय आवंटन यह संकेत देते हैं कि भारत किन देशों को विकास सहयोग, बुनियादी ढांचा निर्माण और मानवीय सहायता के लिए प्राथमिकता दे रहा है। इस बार के बजट में भी यही झलक देखने को मिली है।

पड़ोसी पहले नीति को मिला और बल

सरकार ने एक बार फिर ‘पड़ोसी पहले’ नीति को मजबूती दी है। विदेश मंत्रालय को कुल ₹20,516 करोड़ का आवंटन मिला, जिसमें से लगभग ₹5,483 करोड़ विदेशी देशों को सहायता देने के लिए निर्धारित किए गए। यह राशि क्षेत्रीय स्थिरता, कनेक्टिविटी और विकास सहयोग को बढ़ाने के भारत के संकल्प को दर्शाती है।

भूटान इस सूची में सबसे ऊपर बना हुआ है। उसे ₹2,150 करोड़ की सहायता दी गई है, जो मुख्य रूप से पनबिजली परियोजनाओं, सड़क संपर्क और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए है। नेपाल को ₹700 करोड़ का आवंटन किया गया, जो पिछले वर्ष के बराबर है। यह दोनों देशों के बीच निरंतर और स्थिर विकास सहयोग को दर्शाता है।

द्वीपीय और संकटग्रस्त देशों पर खास ध्यान

मालदीव को दी जाने वाली सहायता बढ़ाकर ₹600 करोड़ कर दी गई, जो रणनीतिक दृष्टि से अहम मानी जा रही है। वहीं आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका के लिए सहायता बढ़ाकर ₹300 करोड़ की गई, ताकि वह अपने पुनर्निर्माण और स्थिरता के प्रयासों को आगे बढ़ा सके।

म्यांमार के लिए आवंटन ₹250 करोड़ से बढ़ाकर ₹350 करोड़ कर दिया गया है। इसका उद्देश्य वहां चल रहे संघर्षों के बीच मानवीय जरूरतों को पूरा करना और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना है।

अन्य देशों के लिए आवंटन

बांग्लादेश को ₹120 करोड़ की सहायता दी गई है। अफगानिस्तान के लिए आवंटन घटाकर ₹100 करोड़ कर दिया गया है, जो पहले ₹200 करोड़ था। भारत ने स्पष्ट किया है कि अफगानिस्तान के साथ उसका जुड़ाव फिलहाल मानवीय सहायता तक सीमित रहेगा।

भारत ने दक्षिण एशिया से बाहर भी अपनी पहुंच बनाए रखी है। अफ्रीकी देशों को कुल ₹225 करोड़ का आवंटन मिला है। यूरेशिया और लैटिन अमेरिका क्षेत्र के लिए ₹100 करोड़ रखे गए, जबकि लैटिन अमेरिका को अतिरिक्त रूप से ₹60 करोड़ का प्रावधान किया गया।

छोटे देशों के लिए सहायता

ईरान के लिए ₹100 करोड़ का विशेष आवंटन किया गया है। मॉरीशस को दी जाने वाली सहायता घटाकर ₹500 करोड़ कर दी गई, जबकि सेशेल्स के लिए आवंटन घटाकर ₹19 करोड़ कर दिया गया है। कुल मिलाकर, यह बजट भारत की संतुलित और रणनीतिक विदेश नीति को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है।

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