जी, हां सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण का निर्देश देने से इनकार कर दिया, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि यह पहले से मौजूद हिंदू मंदिर पर बनाया गया था या नहीं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय को सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 26 नियम 11 के तहत आवेदन पर फैसला करना बाकी है जो आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित है। विवादित मस्जिद के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग को लेकर श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट द्वारा याचिका दायर की गई थी।
ट्रस्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी
ट्रस्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी है, जिसमें मथुरा के सिविल जज को मुकदमे के खिलाफ उठाई गई आपत्तियों पर निर्णय लेने से पहले कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए उसके आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश देने की उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा था।
क्या है श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद?
बता दें कि काशी और मथुरा का विवाद भी कुछ-कुछ अयोध्या की तरह ही है। हिंदुओं का दावा है कि काशी और मथुरा में औरंगजेब ने मंदिर तुड़वाकर वहां मस्जिद बनवाई थी। औरंगजेब ने 1669 में काशी में विश्वनाथ मंदिर तुड़वाया था और 1670 में मथुरा में भगवा केशवदेव का मंदिर तोड़ने का फरमान जारी किया था इसके बाद काशी में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद बना दी गई। मथुरा का ये विवाद कुल 13.37 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक से जुड़ा है। हिंदू पक्ष की ओर से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने और ये जमीन भी श्रीकृष्ण जन्मस्थान को देने की मांग की गई है।
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