क्या POK के लोग पा सकते हैं भारतीय नागरिकता? जानिए क्या है प्रक्रिया जी, हां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) के निवासियों की भारतीय नागरिकता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहते हैं। भारत सरकार की आधिकारिक संवैधानिक स्थिति और लागू कानूनी प्रावधान इस विषय को सामान्य इमीग्रेशन मामलों से अलग दृष्टि से देखते हैं।
POK पर भारत की संवैधानिक स्थिति
पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (POK) अक्सर भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा का विषय रहता है। जब भी इस क्षेत्र में अशांति या विरोध प्रदर्शन की स्थिति बनती है, तब यह सवाल सामने आता है कि क्या POK के निवासी भारत आने पर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं।
भारत सरकार की आधिकारिक स्थिति के अनुसार, यह विषय सामान्य इमीग्रेशन मामलों से अलग है। भारत, POK सहित जम्मू-कश्मीर की पूर्व रियासत को अपना अभिन्न अंग मानता है। इसी संवैधानिक दृष्टिकोण के आधार पर POK के मूल निवासियों को अन्य देशों के नागरिकों की तरह विदेशी नागरिक नहीं माना जाता।
क्या POK के निवासियों को नागरिकता के लिए आवेदन करना पड़ता है?
भारत सरकार की बताई गई स्थिति के अनुसार, केवल POK से संबंधित होने के आधार पर मूल निवासियों को नई नागरिकता प्रक्रिया के तहत आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती। भारत उन्हें अविभाजित जम्मू-कश्मीर का हिस्सा मानता है, इसलिए नागरिकता के उद्देश्य से उन्हें विदेशी शरणार्थी की श्रेणी में नहीं रखा जाता।
हालांकि, अधिकारों का व्यावहारिक उपयोग इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित व्यक्ति कानूनी रूप से भारत में प्रवेश करे तथा उचित दस्तावेजों और सत्यापन के माध्यम से अपने संबंध को स्थापित कर सके।
भारत आने पर क्या होती है प्रक्रिया और CAA का क्या संबंध है?
यदि POK का कोई निवासी कानूनी रूप से भारत आता है, तो संबंधित अधिकारी उसकी पहचान और वंश का सत्यापन करते हैं। व्यक्ति को यह स्थापित करना होता है कि वह या उसके पूर्वज अविभाजित जम्मू-कश्मीर से संबंधित थे। आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह लागू प्रावधानों के अनुसार भारतीय पहचान दस्तावेजों और सरकारी सेवाओं के लिए पात्र हो सकता है।
नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए निर्धारित धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए नागरिकता का मार्ग प्रदान करता है। भारत सरकार की स्थिति के अनुसार, POK के निवासियों को CAA के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं मानी जाती, क्योंकि संवैधानिक दृष्टि से उन्हें विदेशी शरणार्थी नहीं माना जाता।
किन परिस्थितियों में प्रभावित हो सकता है नागरिकता का दावा?
नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9(1) के अनुसार यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण करता है, तो भारतीय नागरिकता समाप्त हो सकती है। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, स्वेच्छा से पाकिस्तानी पासपोर्ट प्राप्त करना या औपचारिक रूप से पाकिस्तान की नागरिकता स्वीकार करना भारतीय नागरिकता के दावे को प्रभावित कर सकता है। ऐसे मामलों में निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया और प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर किया जाता है।
इसके अलावा, 1947, 1965 और 1971 के संघर्षों के दौरान पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्र से विस्थापित होकर जम्मू-कश्मीर पहुंचे हजारों परिवारों को भारत में विस्थापित व्यक्तियों के रूप में पहचाना गया। वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक परिवर्तनों के बाद भी इन परिवारों को अन्य पात्र निवासियों के समान कानूनी अधिकारों तक पहुंच प्राप्त है।
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