वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में श्रृंगार गौरी की पूजा करने का अधिकार मांगने वाली याचिका की मुख्य वादियों में से एक राखी सिंह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चिट्ठी लिखकर इच्छामृत्यु की मांग की है। उन्होंने मामले के अन्य वादियों पर दुष्प्रचार और उत्पीड़न का आरोप लगाया है और कहा है कि मानसिक दबाव के कारण वह इच्छामृत्यु पर विचार कर रही हैं।
हिंदू पक्ष की पैरवी कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन ने राखी सिंह के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। एक अन्य वादी ने भी आरोपों से असहमति जताई है और कहा है कि हम पूरे समर्पण के साथ श्रृंगार गौरी के लिए केस लड़ रहे हैं।
राखी सिंह उन पांच महिला याचिकाकर्ताओं में से एक थीं जिन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में हिंदू प्रार्थना और अनुष्ठानों को करने की अनुमति देने की मांग की थी। अन्य चार याचिकाकर्ताओं द्वारा अपने साथ हुए उत्पीड़न के बारे में विस्तार से बताते हुए राखी ने एक पत्र लिखकर 9 जून को सुबह 9 बजे तक राष्ट्रपति से जवाब मांगा।
उन्होंने हिंदी में लिखे राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में कहा कि मैं 9 जून, 2023 को सुबह 9:00 बजे तक आपके जवाब का इंतज़ार करूंगी। यदि मुझे आपकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो उसके बाद जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह मेरा अपना होगा।
चिट्ठी में वकील पर भी लगाए आरोप
राखी सिंह ने राष्ट्रपति को लिखी अपनी चिट्ठी में लिखा है, ‘ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में मेरे सहयोगियों लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास, रेखा पाठक, (वरिष्ठ) अधिवक्ता हरिशंकर जैन, उनके बेटे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और उनके कुछ सहयोगियों ने मेरे बारे में झूठा प्रचार किया है और मेरी तथा मेरे चाचा-चाची जितेंद्र सिंह विसेन और किरण सिंह को बदनाम करने की कोशिश की। सिंह ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने अफवाह फैलाई कि वह केस वापस ले रही हैं, जबकि न तो मेरी तरफ से ऐसा कोई बयान या सूचना जारी की गई और न ही मामले में मेरी ओर से मेरे वकील मेरे चाचा जितेंद्र सिंह विसेन ने ऐसी कोई सूचना जारी की।
पत्र में आरोप लगाया कि चार याचिकाकर्ता “हिंदू समाज में उसे और उसके पूरे परिवार को बदनाम करने” की कोशिश कर रहे हैं। मई 2022 में उपरोक्त लोगों ने अपने झूठे प्रचार के तहत मेरे खिलाफ एक अफवाह फैलाई। उन्होंने कहा कि राखी सिंह मामले से हट रही हैं, जबकि न तो मैंने और न ही मेरे चाचा जितेंद्र सिंह विसेन जी ने ऐसा कोई बयान जारी किया था।
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