पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर (POK) में पिछले तीन दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अब तक कम से कम 12 नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी 38 मांगों को पूरा करने में नाकाम रही है और सेना की मनमानी बढ़ गई है।
दादियाल और मुज़फ़्फ़राबाद बने केंद्र
गुरुवार को दादियाल में प्रदर्शनकारियों और सेना के बीच झड़प हुई। हालात काबू में करने के लिए हजारों अतिरिक्त सैनिक तैनात किए गए। मुज़फ़्फ़राबाद, रावलाकोट, नी़लम घाटी और कोटली में भी हिंसा फैल गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, केवल मुज़फ़्फ़राबाद और धीरकोट में ही 10 नागरिक मारे गए।
आंदोलन की जड़: विधानसभा सीटें और राहत पैकेज
संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन का मुख्य कारण 12 विधानसभा सीटों का मुद्दा है, जो पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। प्रदर्शनकारी इन सीटों को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा आटा-बिजली पर सब्सिडी, कर में राहत और विकास परियोजनाओं की पूर्ति जैसी मांगें भी शामिल हैं।
बाजार बंद, संचार सेवाएं ठप
29 सितंबर से बाजार और दुकानें बंद हैं। मोबाइल, इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाएं भी पूरी तरह ठप कर दी गई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में हजारों प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरकर नारेबाजी करते और सेना के खिलाफ जमकर विरोध करते दिखाई दे रहे हैं।
सरकार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि मुद्दों को सुलझाने के लिए वार्ता समिति बनाई गई है। वहीं, यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
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