जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां सीमा पार से हो रही संदिग्ध गतिविधियों, अवैध संचार नेटवर्क और आतंकी तंत्र को फिर से सक्रिय करने की कोशिशों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। हाल के अभियानों में सुरक्षा बलों को कई महत्वपूर्ण सफलता मिली हैं, जिससे क्षेत्र में सक्रिय नेटवर्क और उनकी रणनीतियों को लेकर नई जानकारियां सामने आई हैं।
उरी सेक्टर में पीओके जाने की कोशिश कर रहे तीन लोग हिरासत में
बारामूला जिले के उरी सेक्टर में सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर तीन लोगों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, ये लोग कथित तौर पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की ओर जाने का प्रयास कर रहे थे।
खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए ऑपरेशन में सोपोर के दो निवासियों और उनके एक स्थानीय गाइड को पकड़ा गया। उनकी पहचान आदिल हुसैन, इशफाक लोन और जाफर हाफिज के रूप में हुई है। सुरक्षा एजेंसियां मामले की गहन जांच कर रही हैं और उनके संभावित संपर्कों व उद्देश्य का पता लगाने में जुटी हैं।
एलओसी पार कर भारतीय क्षेत्र में पहुंचा युवक गिरफ्तार
उरी क्षेत्र में ही एक अन्य कार्रवाई के दौरान सेना ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर भारतीय सीमा में दाखिल हुए पीओके के एक युवक को भी पकड़ा। उसकी पहचान मुजफ्फराबाद निवासी 22 वर्षीय जीशान मीर के रूप में हुई है।
प्रारंभिक पूछताछ में युवक ने दावा किया कि वह सोशल मीडिया पर संपर्क में आई एक युवती से मिलने के लिए सीमा पार कर आया था। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस के हवाले कर दिया गया।
अवैध दूरसंचार संकेतों से बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
सुरक्षा अधिकारियों ने सीमा पार से भेजे जा रहे अवैध दूरसंचार संकेतों को गंभीर चुनौती बताया है। उनका कहना है कि पाकिस्तान की ओर से भेजे जा रहे ये संकेत अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार मानकों का उल्लंघन करते हैं और इनका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में गुप्त संचार के लिए किया जा सकता है।
अधिकारियों के अनुसार, नियंत्रण रेखा के निकट पीओके क्षेत्र में दूरसंचार टावरों की संख्या बढ़ी है। इन टावरों के संकेत भारतीय सीमा के भीतर कई संवेदनशील इलाकों तक पहुंच रहे हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।
जम्मू क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में मिले संकेत
जानकारी के मुताबिक, कठुआ, राजौरी, पुंछ और अत्यंत संवेदनशील कोट बलवाल जेल क्षेत्र में ऐसे संकेतों की पहचान की गई है। एजेंसियों को आशंका है कि जेलों में अवैध रूप से पहुंचाए गए मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों के माध्यम से इन संकेतों का दुरुपयोग किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा पारंपरिक जैमर इन संचार संकेतों को पूरी तरह रोकने में सक्षम नहीं हैं। इसी वजह से आधुनिक और अगली पीढ़ी की तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है, जो अनधिकृत उपकरणों की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय कर सकें।
आतंकी संचालकों से संपर्क बनाए रखने की आशंका
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा पार स्थापित ऐसे संचार नेटवर्क आतंकियों और उनके संचालकों के बीच संपर्क बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, एजेंसियां पहले भी कई अवैध नेटवर्क ध्वस्त कर चुकी हैं और वर्तमान में भी ऐसे प्रयासों को विफल करने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं।
आईएसआई की नई रणनीति पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर
सुरक्षा अधिकारियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की कथित नई रणनीति को लेकर भी चिंता जताई है। अधिकारियों के अनुसार, आईएसआई अपने पुराने ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) नेटवर्क से जुड़े लोगों को मुख्यधारा की राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
हाल में गिरफ्तार कुछ संदिग्धों से पूछताछ के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि उनका संबंध राजनीतिक गतिविधियों से भी रहा है। एजेंसियों का मानना है कि इसका उद्देश्य सुरक्षा जांच और कार्रवाई से बचाव का रास्ता तैयार करना हो सकता है।
कमजोर पड़ते नेटवर्क को बचाने की कोशिश
अधिकारियों के मुताबिक, लगातार आतंक विरोधी अभियानों और सुरक्षा कार्रवाइयों के कारण आईएसआई समर्थित पारंपरिक नेटवर्क कमजोर हुआ है। स्थानीय स्तर पर समर्थन कम होने के बाद अब नए तरीकों से प्रभाव बढ़ाने और समर्थकों को संरक्षण देने की कोशिश की जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि तलाशी और घेराबंदी अभियानों के दौरान कुछ संदिग्ध व्यक्ति राजनीतिक दलों की सदस्यता का हवाला देकर जांच से बचने का प्रयास करते हैं। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी मुख्यधारा के राजनीतिक दल के नेतृत्व द्वारा ऐसे लोगों को बचाने की कोई कोशिश सामने नहीं आई है।
पुराने आतंकी संगठनों को फिर सक्रिय करने की कोशिश
सुरक्षा एजेंसियां उन आतंकी संगठनों की गतिविधियों पर भी नजर रख रही हैं, जो 1990 और 2000 के शुरुआती वर्षों में जम्मू-कश्मीर में सक्रिय थे। अधिकारियों के अनुसार, अल-उमर मुजाहिदीन, अल बदर और तहरीक-उल-मुजाहिदीन जैसे संगठनों के नाम फिर से सामने आ रहे हैं।
एजेंसियों का मानना है कि इन संगठनों को दोबारा सक्रिय कर यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि जम्मू-कश्मीर में हिंसा स्थानीय स्तर पर संचालित है, जबकि इनके शीर्ष संचालक पाकिस्तान और पीओके में मौजूद सुरक्षित ठिकानों से गतिविधियों का संचालन करते हैं।
खुफिया एजेंसियों की सतत निगरानी जारी
केंद्रीय और स्थानीय खुफिया एजेंसियां इन सभी घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखे हुए हैं। सुरक्षा बल आतंकी समर्थकों के रसद नेटवर्क, वित्तीय सहायता तंत्र और कट्टरपंथ फैलाने वाली गतिविधियों को निष्क्रिय करने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। इसके साथ ही युवाओं को कट्टरपंथी विचारधाराओं से बचाने और उन्हें गुमराह होने से रोकने के लिए भी व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
बदलते स्वरूप में सामने आ रही हैं सुरक्षा चुनौतियां
हालिया घटनाएं संकेत देती हैं कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां लगातार नया स्वरूप ले रही हैं। सीमा पार घुसपैठ, अवैध संचार नेटवर्क और आतंकी संगठनों को पुनर्जीवित करने की कोशिशों के बीच सुरक्षा एजेंसियां बहुस्तरीय रणनीति के तहत काम कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए खुफिया समन्वय, तकनीकी क्षमता और निगरानी तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
इसे भी पढ़े- पवन खेड़ा की कोर्ट में होगी पेशी, ट्रांजिट रिमांड पर असम ले जाएगी पुलिस
