खबर संसार, नई दिल्ली : तो क्या सपा के साथ जाकर chandrashekhar (रावण) बिगाड़ेंगे मायावती का ‘खेल’!, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को देखते हुए अब आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण ने सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद दोनों दलों के बीच गठबंधन होने के कयास लगाए जाने लगे हैं। बता दें कि इन दोनों नेताओं के बीच गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत लगभग फाइनल हो चुकी है।
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की बात करें तो वह इस बार 2022 का विस चुनाव नहीं लड़ेंगी, बल्कि उनकी पार्टी बसपा चुनावी मैदान में होगी। तो ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या chandrashekhar बसपा प्रमुख मायावती का 2022 विस चुनाव में खेल बिगाड़ सकते हैं। सपा-कार्यालय लखनऊ में आज स्वामी प्रसाद मोर्य, धर्म सिंह सैनी, भगवती सागर, विनय शाक्य समेत बीजेपी के आठ विधायकों ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा का दामन थामा लिया।
दलित वोटरों पर अखिलेश की नजर
दलित वोटों को लेकर तो सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की दिलचस्पी जगजाहिर है यही वजह है कि 2019 में मायावती के साथ सपा-बसपा गठबंधन का आधार बना था। ताजा मामलों की बात करें तो chandrashekhar में भी अखिलेश यादव को मायावती का अक्स दिखायी देता है? अगर ऐसा वास्तव में है तो निश्चित तौर पर अखिलेश यादव एक बार चंद्रशेखर के साथ चुनावी गठबंधन को लेकर गंभीरता से विचार कर सकते हैं।
पश्चिमी यूपी में chandrashekhar की अच्छी पकड़
आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे भाजपा को को हराने के लिए किसी भी दल के साथ गठबंधन कर सकते हैं। दरअसल उत्तरप्रदेश में करीब 22 प्रतिशत दलित आबादी रहती है ये समुदाय पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर सीधा अपना प्रभाव रखते हैं। इतना ही नहीं यूपी की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 85 सीटें दलितों के लिए आरक्षित हैं। chandrashekhar पश्चिमी यूपी के सहारनपुर से हैं, ऐसे में अगर वह सपा के साथ जाते हैं तो बपसा के लिए ये अच्छी खबर नहीं होगी। चन्द्रशेखर का उभार पिछले दो-तीन सालों में दलित नेता को तौर पर हुआ है। उनके साथ दलित युवाओं की अच्छी खासी भीड़ भी देखी जा सकती है।


