सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा को बेहद खास त्योहार माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी जी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इसके अलावा भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में धन की कमी दूर होती है।
हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को ही शरद पूर्णिमा कहा जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन आकाश से अमृत की बूंदों की वर्षा होती है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। अंतरिक्ष के समस्त ग्रहों से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा चंद्रकिरणों के माध्यम से पृथ्वी पर पड़ती हैं।
पूर्णिमा की चांदनी में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखने के पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि चंद्रमा के औषधीय गुणों से युक्त किरणें पड़ने से खीर भी अमृत के समान हो जाएगी। उसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होगा।
ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति
इस साल शरद पूर्णिमा पर गुरु अपनी ही राशि मीन में चंद्रमा के साथ रहेगा। इनकी युति से गजकेसरी नाम का बड़ा शुभ योग बनेगा। वहीं बुध ग्रह अपनी ही राशि में सूर्य के साथ रहेगा। जिससे बुधादित्य योग बनेगा। इस पर्व पर शनि भी स्वराशि में रहेगा। जिससे शश योग रहेगा। साथ ही तिथि, वार और नक्षत्र से मिलकर सर्वार्थसिद्धि, ध्रुव और स्थिर नाम के शुभ योग बनेंगे। इस तरह सालों बाद सितारों का ऐसा शुभ संयोग बनेगा।
कोजागरी पूर्णिमा भी है दूसरा नाम
बताया जाता है कि देश के कई इलाकों में शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कोजागरी पूर्णिमा का त्योहार पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। कोजागरी पूर्णिमा पर लक्ष्मी जी की विशेष पूजा की जाती है। साथ में भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है। पश्चिम बंगाल व ओडिशा में मान्यता है कि विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति को आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
शरद पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त
- शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा 9 अक्टूबर 2022
- पूर्णिमा तिथि आरंभ-9 अक्टूबर 2022 को सुबह 3:41 मिनट से
- पूर्णिमा तिथि समाप्त- 10 अक्टूबर 2022 को सुबह 2:25 मिनट
शरद पूर्णिमा महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी की समुद्र मंथन से उत्पत्ति शरद पूर्णिमा के दिन ही हुई थी। इसलिए इस तिथि को धन-दायक भी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं और जो लोग रात्रि में जागकर मां लक्ष्मी का पूजन करते हैं, वे उस पर अपनी कृपा बरसाती हैं और धन-वैभव प्रदान करती हैं।
शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ होता और पृथ्वी पर चारों चंद्रमा की उजियारी फैली होती है। धरती जैसे दूधिया रोशनी में नहा जाती है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत की बरसात होती है, इसलिए रात्रि में चांद की रोशनी में खीर रखने की परंपरा भी है।
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