खबर संसार हल्द्वानी।तस्वीर का दूसरा पहलू,बनभूलपुरा अतिक्रमण हटने पर दर्जनों ट्रेन को मिलेंगी हरी झंडी। जी हा ये बात भीं पूरी तरह सच है कि रेलवे पट्टियों को बिछाने के लिए जगह चाहिए और ये जगह अतिक्रमण के कारण रेलवे को नही मिल पा रही हैं। जिससे नई नई रेल की सुविधा से वंचित खासकर हल्द्वानी सहित कुमाऊं मण्डल के लोगो के साथ साथ पर्यटक भी वंचित हो रहे है। निश्चित रूप से इसके दर्जनों अप्रत्यक्ष फायदे भी मिलेंगे। बताया जा रहा है कि 29 एकड़ जमीन पर रेलवे को कब्जा मिलने से शुरू हो सकेंगी दूरदराज की ट्रेने।कब्जे वाली जमीन पर पिट लाइन व शंटिंग नेक बनाने की है योजना।रेलवे हल्द्वानी में स्टेशन के विस्तार के लिए जरूरी मान रहा जमीन। निश्चित रूप से अगर जगह मिल जाती है तो कुमाऊं के पर्यटन को लगेंगे पंख।
तस्वीर का दूसरा पहलू,बनभूलपुरा अतिक्रमण हटने पर दर्जनों ट्रेन को मिलेंगी हरी झंडी
इधर तस्वीर का पहला पहलू बनभूलपुरा अतिक्रमण जिसमे करीब 4363 घर आ रहे है को लेकर इस समय सुप्रीम कोर्ट तक मामला चला गया है। कई लोगो ने याचिका दायर की है। जिसमे हल्द्वानी विधायक सुमित हरदेश सलमान खुर्शीद के जरिए तो मतीन सिद्दीकी प्रशांत भूषण के जरिए बचाव की कोशिश में है, कि अतिक्रमण को इस तरह नही तोड़ना चाहिए जिस तरह बताया जा रहा है। तो दूसरी ओर हल्द्वानी गोलापार निवासी रविशंकर ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैवियेट दाखिल कर दी है।5 जनवरी को मामला सुप्रीम कोर्ट में आयेगा। दूसरी ओर रेलवे,पुलिस प्रशासन ने कमर कस ली है पूरी तैयारिया हो चुकी है। नोटिस जारी कर दिए है एक सप्ताह का समय है जिसमे। फोर्स के लिए टॉयलेट बाथरूम बन रहे और कई बन गए है।
इधर हाईकोर्ट के आदेश के बाद 29 एकड़ भूमि रेलवे को मिलती है तो हल्द्वानी शहर रेलमार्ग के जरिये देश के कोने-कोने से सीधे जुड़ सकेगा _जिस से कुमाऊं के पर्यटन का भी विकास होगा ।_ यहां नए यार्ड के साथ करीब 10 रेलवे ट्रैक बन सकेंगे। जिससे यहां आने वाली ट्रेनों की संख्या में इजाफा किया जा सकेगा । _साथ ही क्षेत्रीय औद्योगिक विकास के लिए मालगोदाम की संभावना भी है ।जानकारी के मुताबिक काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर सीमित जगह होने के चलते वहां नए ट्रैक बनाए जाने संभव नहीं है। हालत यह है कि ट्रेनों की शंटिंग यानि एक से दूसरे ट्रैक पर लाने में भी काफी समय लग जाता है। काठगोदाम में यार्ड इतना छोटा है कि वहां एक से दो ट्रेनों को ही खड़ा किया जा सकता है। जिसके चलते काठगोदाम से ज्यादा ट्रेनों का संचालन नहीं किया जा सकता।
रेल सूत्रों के अनुसार 29 एकड़ भूमि मिलने पर हल्द्वानी रेलवे स्टेशन पर नया यार्ड बनाया जा सकता है। इसके भीतर करीब 10 ट्रैक बनाकर उन पर ट्रेनों को खड़ा करने की व्यवस्था होगी। इसके अतिरिक्त एक डिपो बनाया जा सकता है। जिसमें ट्रेनों की मरम्मत, रंगाई पुताई, साफ सफाई की जा सकती है। इसके अलावा शंटिंग नेक बनाए जाने की संभावना है। काठगोदाम के शंटिंग नेक में अभी मात्र 6 कोच की शंटिंग ही हो पा रही है, यदि हल्द्वानी में शंटिंग नेक बनाई जाती है तो करीब 18 कोच की शंटिंग की जा सकेगी। जमीन मिलने पर हल्द्वानी से देश के दूरदराज के इलाकों तक लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन शुरू हो सकेगा। वहीं वर्तमान में जो ट्रेनें साप्ताहिक हैं डिमांड के अनुसार उनके फेरे भी बढ़ाए जा सकेंगे। निश्चित रूप से अगर जगह उपलब्ध होती है तो विकास होगा।
