सुप्रीम कोर्ट द्वारा 4 अगस्त को ‘मोदी’ उपनाम मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने के बाद, राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कहा कि हालांकि शीर्ष अदालत ने सजा आदेश पर रोक लगा दी है, लेकिन कानून की नज़रों में राहुल गांधी अभी भी एक दोषी हैं।
राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दायर करने वाले भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी की ओर से पेश हुए जेठमलानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में गुजरात उच्च न्यायालय और सूरत मजिस्ट्रेट अदालत के दोषसिद्धि आदेश पर रोक लगा दी, क्योंकि दो वर्ष की जेल की सजा के लिए अदालत द्वारा अपर्याप्त कारण दिए गए थे।
उन्होंने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि पहले सुनाई गई दो साल की सज़ा के लिए पर्याप्त कारण नहीं दिए गए थे। कोर्ट ने कहा कि अधिकतम सज़ा के लिए पर्याप्त कारण दिए जाने चाहिए थे। हालांकि कोर्ट ने आज दोषसिद्धि पर रोक लगा दी। मगर, कानून की नजर में वह अभी भी दोषी हैं। जेठमलानी ने आगे कहा कि वह अब सेशन कोर्ट में अपील करेंगे और कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
रोक का मतलब है कि दोषसिद्धि के परिणाम – जैसे अयोग्यता – पर रोक लगा दी जाएगी
उन्होंने कहा कि, “रोक का मतलब है कि दोषसिद्धि के परिणाम – जैसे अयोग्यता – पर रोक लगा दी जाएगी, क्योंकि कारण पर्याप्त नहीं थे। लेकिन अब, सत्र अदालत में अपील की जाएगी। मजिस्ट्रेट की अदालत का फैसला सजा और दोषसिद्धि दोनों के लिए सही है, लेकिन इसके कारण ‘रहें’, वह संसद में लौट सकते हैं।” वरिष्ठ वकील ने उम्मीद जताई कि जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ेगा कांग्रेस नेता दोषी साबित होंगे।
उन्होंने कहा कि, “मामले का तथ्य यह है कि वह (राहुल गांधी) एक दोषी है और जब मामला चलेगा, तो मुझे उम्मीद है, वह दोषी साबित हो जाएंगे। मैं यह नहीं कह सकता कि सत्र न्यायालय क्या सजा सुनाएगा – 2 साल या उससे कम या ठीक है। लेकिन जो सबूत पेश किए गए हैं वे इतने मजबूत हैं कि उन्हें दोषसिद्धि से बरी नहीं किया जा सकेगा।” इस बीच शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी ने कहा था कि वह शीर्ष अदालत के आदेश का स्वागत करते हैं, हालांकि, वह अदालत में अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
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