नई दिल्ली। दिल्ली मॉडल पर गर्व: केजरीवाल बोले- मेरे को तो मिलना चाहिए नोबेल पुरस्कार जी, हां दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के मोहाली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि जब तक हमारी सरकार दिल्ली में सत्ता में थी, तब तक हमें काम करने की अनुमति नहीं दी गई, फिर भी हमने काम किया।
उन्होंने आगे कहा मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मैंने दिल्ली में जितना काम किया है, उसके लिए मुझे शासन और प्रशासन का नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो गया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
शिक्षा और स्वास्थ्य का दिया हवाला (Diya hawala of education and health)
केजरीवाल ने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली सरकार ने जो सुधार किए हैं, वे दुनिया के कई विकसित देशों से भी बेहतर हैं। उन्होंने दावा किया कि आज दिल्ली के सरकारी स्कूल निजी स्कूलों से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही, मोहल्ला क्लीनिक मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। उन्होंने कहा, “हमने जनता को 24 घंटे मुफ्त बिजली और पानी जैसी सुविधाएं दीं। अगर निष्पक्षता से देखा जाए तो इन कामों के लिए मुझे नोबेल प्राइज मिलना चाहिए।”
बयान पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
हालांकि केजरीवाल “नोबेल पुरस्कार” वाला बयान मजाकिया अंदाज में दिया गया था, लेकिन इसके पीछे उनका आत्मविश्वास और दिल्ली मॉडल पर भरोसा साफ झलक रहा था। सभा में मौजूद लोग उनकी बात सुनकर मुस्कुराए और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। वहीं विपक्ष ने इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी नेताओं ने कहा कि यह बयान घमंड का प्रतीक है और अभी भी दिल्ली में कई समस्याएं जस की तस हैं। कांग्रेस नेताओं ने भी तंज कसा कि जनता की समस्याओं को हल करने के बजाय केजरीवाल अपनी ही तारीफों में व्यस्त हैं।
सोशल मीडिया पर बहस (Debates on social media)
सोशल मीडिया (Debates on social media) पर केजरीवाल के इस बयान को लेकर लोग दो खेमों में बंट गए। उनके समर्थकों ने इसे एक ईमानदार और साहसिक नेता का आत्मविश्वास बताया। कई यूजर्स ने लिखा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दिल्ली सरकार का काम वाकई दुनिया के लिए मिसाल है। वहीं विरोधियों ने इसे ‘राजनीतिक ड्रामा’ और ‘पब्लिसिटी स्टंट’ करार दिया। कई मीम्स और चुटकुले भी शेयर किए गए, जिनमें केजरीवाल के नोबेल प्राइज मांगने पर व्यंग्य किया गया।
चर्चा में दिल्ली मॉडल (Delhi model in discussion)
केजरीवाल का यह बयान भले ही गंभीर था या व्यंग्यपूर्ण, लेकिन एक बार फिर उन्होंने जनता और मीडिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। नोबेल प्राइज मिले या न मिले, लेकिन यह बहस जरूर शुरू हो गई कि क्या भारत के नेता अब ऐसे काम करने लगे हैं जिन्हें वैश्विक मंच पर सम्मान मिल सके।
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