पटना। बिहार की सियासत में नया मोड़ आ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। सवाल उठ रहा है—क्या राहुल ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव का पूरा समीकरण बदल दिया है? बीजेपी में बेचैनी और महागठबंधन के भीतर बढ़ती खींचतान ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
राहुल की यात्रा से बढ़ा बीजेपी का तनाव
राहुल गांधी की यात्रा 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई थी। यह अभियान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर केंद्रित है। कांग्रेस का दावा है कि इस यात्रा ने ग्रामीण इलाकों में बड़ी पकड़ बनाई है। सुपौल, सीतामढ़ी, देहरी जैसे क्षेत्रों में राहुल की सभाओं में बड़ी भीड़ देखने को मिली। इससे बीजेपी में बैकफुट और तेजस्वी यादव की लोकप्रियता में गिरावट की चर्चा तेज हो गई है।
पटना में कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने
शुक्रवार को पटना की सड़कों पर कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झड़प हुई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सदाकत आश्रम पर हमला किया, गाड़ियों में तोड़फोड़ की। वहीं बीजेपी ने इसे राजनीतिक नाटक बताते हुए आरोपों को खारिज किया। इस झड़प के बाद सियासी माहौल और गर्म हो गया है।
तेजस्वी की भूमिका कमजोर?
राहुल गांधी की सक्रियता ने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की चमक फीकी कर दी है। चिराग पासवान ने भी तंज कसा कि आरजेडी अब कांग्रेस की पिछलग्गू बन गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस अब महागठबंधन में ज्यादा सीटों की मांग कर सकती है। एक सर्वे के मुताबिक, अगर आज चुनाव हों तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।
बीजेपी के लिए चुनौती
राहुल की यात्रा ने दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वोटरों को लामबंद करने का दावा किया है। कांग्रेस का कहना है कि 65 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। यह मुद्दा बीजेपी के वोटबैंक को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, बीजेपी पीएम मोदी के विकास मॉडल और नीतीश कुमार की साख पर भरोसा कर रही है।
बिहार की 243 सीटों पर अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होने हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी बीजेपी को कड़ी टक्कर देंगे? या नीतीश और एनडीए फिर से सत्ता में लौटेंगे?
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