भारत के 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार वैश्विक कूटनीति का खास संदेश देखने को मिलेगा। यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंतोनियो लुईस सांतोस दा कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन सोमवार को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह पहली बार है जब यूरोपीय यूनियन के इतने शीर्ष स्तर के नेता एक साथ भारत के राष्ट्रीय समारोह में भाग लेंगे।
भारत-EU रिश्तों में नया मोड़
इस दौरे का सबसे अहम एजेंडा भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को आगे बढ़ाना है। भारत, जो एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, यूरोप के लिए एक अहम व्यापारिक साझेदार बनता जा रहा है। स्टेट डिनर और औपचारिक कार्यक्रमों के अलावा दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन पर गहन चर्चा होगी।
ट्रंप फैक्टर और यूरोप की चिंता
यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब यूरोप वैश्विक राजनीतिक दबावों से गुजर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ग्रीनलैंड को लेकर विवाद के दौरान यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ ट्रेड वॉर तेज करने की धमकी दी थी, हालांकि बाद में वह बयान से पीछे हट गए। इसके बावजूद यूरोप वैकल्पिक और भरोसेमंद साझेदारों की तलाश में है, जिसमें भारत अहम भूमिका निभा सकता है।
भारत की कूटनीतिक रणनीति का संकेत
विशेषज्ञ मानते हैं कि मुख्य अतिथियों का चयन भारत की बदलती कूटनीतिक सोच को दर्शाता है। भारत अब केवल पारंपरिक साझेदारों तक सीमित न रहकर यूरोप, अफ्रीका और इंडो-पैसिफिक देशों के साथ अपने रणनीतिक और व्यापारिक संबंधों को तेज़ी से मजबूत कर रहा है। यह दौरा आने वाले वर्षों में भारत-EU रिश्तों को नई दिशा दे सकता है।
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