अचानक कुर्सी या बिस्तर से उठते ही चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छा जाना या गिरने जैसा महसूस होना एक आम लेकिन नजरअंदाज की जाने वाली समस्या है. मेडिकल भाषा में इसे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहा जाता है. यह तब होता है जब शरीर बैठी या लेटी स्थिति से खड़े होने पर ब्लड प्रेशर को तेजी से संतुलित नहीं कर पाता, जिससे दिमाग तक खून की सप्लाई कम हो जाती है.
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
न्यूरोलॉजिस्ट बताते हैं कि खड़े होते ही ग्रेविटी की वजह से खून पैरों की ओर चला जाता है. सामान्य स्थिति में ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम नसों को सिकोड़कर और दिल की धड़कन बढ़ाकर इसकी भरपाई कर लेता है. लेकिन जब यह प्रक्रिया धीमी हो जाती है, तो चक्कर आने लगते हैं. डायटीशियन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन भी इसकी बड़ी वजह है.
किन कारणों से बढ़ता है खतरा?
डिहाइड्रेशन, खून की कमी, लंबे समय तक बिस्तर पर रहना, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज की कुछ दवाएं और बढ़ती उम्र इस समस्या को बढ़ा सकती हैं. रिसर्च में यह भी सामने आया है कि खड़े होने के 30 सेकंड के भीतर अगर सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 20 mmHg से ज्यादा गिरता है, तो भविष्य में डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है.
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी?
अगर बार-बार खड़े होते ही चक्कर आए, गिरने का डर लगे या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. खासकर बुजुर्गों में यह समस्या गिरने, हड्डी टूटने और गंभीर चोट का कारण बन सकती है.
कैसे करें बचाव?
धीरे-धीरे खड़े होना, पर्याप्त पानी पीना, नमक और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बनाए रखना, पैरों की हल्की एक्सरसाइज करना और फिसलन से बचाव के इंतजाम बेहद जरूरी हैं. समय रहते ध्यान देने से इस समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है.
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