खांसी एक ऐसी परेशानी है जो लगभग हर व्यक्ति को कभी न कभी होती है। अक्सर लोग इसे मौसम बदलने या हल्की एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहे या उसके साथ बलगम आने लगे, तो यह शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकती है।
आखिर खांसी क्यों आती है?
खांसी हमारे शरीर की एक नेचुरल डिफेंस सिस्टम है। जब गले या फेफड़ों में धूल, धुआं, प्रदूषण, एलर्जी के कण या कीटाणु जमा हो जाते हैं, तो शरीर खांसी के जरिए उन्हें बाहर निकालने की कोशिश करता है। खांसी के आम कारणों में सर्दी-जुकाम, वायरल इंफेक्शन, प्रदूषण, एलर्जी, अस्थमा, एसिड रिफ्लक्स (GERD) और फेफड़ों में ज्यादा बलगम बनना शामिल है।
बलगम (कफ) क्या है और क्यों बनता है?
बलगम एक गाढ़ा और चिपचिपा पदार्थ होता है, जिसे फेफड़े और श्वसन नलिकाएं बनाती हैं। इसका काम नलिकाओं को नम रखना और धूल-कीटाणुओं को फंसा कर बाहर निकालना होता है। हल्का और साफ बलगम बनना सामान्य है, लेकिन ज्यादा मात्रा में या रंग बदलने वाला बलगम समस्या का संकेत हो सकता है।
सूखी खांसी और कफ वाली खांसी में फर्क
सूखी खांसी में बलगम नहीं निकलता और गले में जलन या खुजली होती है। यह एलर्जी या वायरल इंफेक्शन से जुड़ी होती है। वहीं कफ वाली खांसी में गाढ़ा बलगम निकलता है, जो ब्रोंकाइटिस, निमोनिया या फेफड़ों के इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।
क्या फेफड़ों में जमा बलगम खतरनाक है?
सामान्य स्थिति में बलगम खतरनाक नहीं होता, लेकिन अगर उसका रंग पीला, हरा या उसमें खून दिखे, तो सावधान हो जाना चाहिए। तीन हफ्तों से ज्यादा खांसी रहना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, तेज बुखार या घरघराहट जैसी आवाज गंभीर बीमारियों जैसे अस्थमा, COPD या टीबी का संकेत हो सकती है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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