संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक हालिया रिपोर्ट में भारत को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। खासतौर पर इज़राइल के साथ भारत के रणनीतिक और रक्षा संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की आशंका जताई गई है। यह रिपोर्ट यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल (UNHRC) में पेश की गई, जिसने वैश्विक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
भारत की भूमिका पर उठे कानूनी सवाल
यूएन की स्पेशल रैपोर्टियर फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने अपनी रिपोर्ट में भारत की भूमिका को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इज़राइल के साथ जारी रक्षा सहयोग और हथियार आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ हो सकती है। रिपोर्ट में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) के फैसलों का भी हवाला दिया गया है।
‘टॉर्चर एंड जेनोसाइड’ रिपोर्ट में क्या है दावा?
अल्बानीज़ द्वारा पेश की गई ‘टॉर्चर एंड जेनोसाइड’ नामक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2023 से इज़राइल द्वारा फिलिस्तीनियों पर योजनाबद्ध तरीके से अत्याचार किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गाज़ा के हालात बेहद गंभीर हैं और वहां की जेलों को एक बड़े ‘टॉर्चर कैंप’ के रूप में दर्शाया गया है।
चौंकाने वाले आंकड़े
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक:
- 18,500 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया
- करीब 1,500 बच्चे भी हिरासत में लिए गए
- 4,000 से ज्यादा लोग कथित रूप से लापता किए गए
इन आंकड़ों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता को और बढ़ा दिया है।
भारत-इज़राइल संबंधों पर वैश्विक बहस
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत और इज़राइल के बीच गहरे राजनीतिक और सैन्य संबंध, क्षेत्र में जारी हिंसा के तंत्र को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दे सकते हैं। अल्बानीज़ ने चेतावनी दी कि इस प्रकार के संबंध अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और बयान
एक इंटरव्यू के दौरान अल्बानीज़ ने भारत, इज़राइल और ऐतिहासिक फिलिस्तीन के बीच समानताओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन सभी की जड़ें ब्रिटिश औपनिवेशिक दौर से जुड़ी हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य होने के नाते इन देशों की कुछ अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियां तय होती हैं।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद भारत की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
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