फारस की खाड़ी को दुनिया के बड़े ऊर्जा बाजारों से जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में है। हर दिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है। ऐसे में इस जलमार्ग में किसी भी प्रकार का व्यवधान सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों को प्रभावित करता है।
अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से जारी तनाव के बाद अब इस समुद्री मार्ग को फिर से सामान्य रूप से खोलने की दिशा में सहमति बनती दिखाई दे रही है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को स्थायी रूप से टोल-फ्री रखा जाएगा। हालांकि, ईरान ने संकेत दिए हैं कि जहाजों को कुछ सेवाओं के बदले शुल्क देना पड़ सकता है।
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दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है
वैश्विक पेट्रोलियम सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। वहीं, दुनिया में होने वाले LNG निर्यात का करीब एक-चौथाई हिस्सा भी इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। यही वजह है कि इस जलडमरूमध्य में स्थिरता को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम माना जाता है।
क्या होर्मुज से गुजरने पर लगेगा टोल?
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए हालिया समझौते में संघर्ष खत्म करने और समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने की रूपरेखा तय की गई है। समझौते की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों को उम्मीद जगी कि खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति फिर सामान्य हो सकती है।
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डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कोई टोल नहीं लगाया जाएगा। उनके इस बयान को बाजार में भरोसा बहाल करने और समुद्री व्यापार को सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, ईरान ने अपने बयान में कुछ अलग संकेत दिए। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि तेहरान सीधे ट्रांजिट टोल लगाने की योजना नहीं बना रहा है, लेकिन जहाजों को कुछ विशेष सेवाओं के लिए भुगतान करना पड़ सकता है।
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किन सेवाओं के लिए लिया जा सकता है शुल्क?
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, समुद्री निगरानी, पर्यावरण सुरक्षा और नौवहन सहायता जैसी सेवाओं के लिए शुल्क लिया जा सकता है। हालांकि, अभी तक इन सेवाओं का पूरा ढांचा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
बीते कुछ महीनों में समुद्री सुरक्षा और शिपिंग संचालन को लेकर ईरान लगातार नए नियमों पर चर्चा करता रहा है। मई में ईरान ने ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ नाम की एक संस्था भी बनाई थी। इसका उद्देश्य सुरक्षित समुद्री मार्ग के लिए परमिट प्रणाली को संचालित करना बताया गया था।
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टोल और सेवा शुल्क में क्या अंतर है?
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुसार टोल और सेवा शुल्क दोनों अलग-अलग अवधारणाएं हैं। टोल वह अनिवार्य शुल्क होता है जो किसी जहाज से केवल किसी विशेष जलमार्ग से गुजरने के बदले लिया जाता है। यानी जहाज किसी सेवा के लिए नहीं, बल्कि रास्ते के उपयोग के लिए भुगतान करता है।
इसके विपरीत, सेवा शुल्क किसी विशेष सुविधा या सहायता के बदले लिया जाता है। इसमें पायलट सहायता, टगबोट सेवा, समुद्री ट्रैफिक प्रबंधन, लाइटहाउस संचालन, ड्रेजिंग और आपातकालीन सहायता जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, सेवा शुल्क का उद्देश्य सुरक्षा और संचालन व्यवस्था बनाए रखने की लागत को पूरा करना होता है, जबकि टोल सीधे मार्ग के उपयोग से जुड़ा होता है।
पनामा और स्वेज नहर से अलग क्यों है होर्मुज?
पनामा नहर और स्वेज नहर से गुजरने वाले जहाजों को पहले से ही भारी शुल्क देना पड़ता है। ये दोनों मानव निर्मित नहरें हैं, जिनके संचालन और रखरखाव पर बड़ा खर्च आता है। इसलिए वहां लिया जाने वाला शुल्क कानूनी और सामान्य माना जाता है।
लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य एक प्राकृतिक समुद्री मार्ग है। ऐतिहासिक रूप से यहां से जहाज बिना किसी ट्रांजिट शुल्क के गुजरते रहे हैं। ऐसे में यदि यहां स्थायी टोल व्यवस्था लागू होती है, तो इसका असर दुनिया के अन्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर भी पड़ सकता है।
ट्रांजिट पैसेज को लेकर क्या है कानूनी विवाद?
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून UNCLOS के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को एक अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य माना जाता है। इसके तहत ‘ट्रांजिट पैसेज’ का सिद्धांत लागू होता है, जो जहाजों को बिना रुकावट लगातार आवाजाही का अधिकार देता है।
इस नियम के तहत व्यापारिक जहाज, तेल टैंकर और सैन्य पोत बिना रोके इस जलमार्ग से गुजर सकते हैं। साथ ही तटीय देशों को इस अधिकार में बाधा डालने की अनुमति नहीं होती। समुद्री विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिद्धांत वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और नौसैनिक संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
वैश्विक बाजार की नजर होर्मुज पर
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियां कितनी तेजी से सामान्य होती हैं। यदि यह मार्ग स्थिर और सुरक्षित बना रहता है, तो इससे वैश्विक तेल बाजार को राहत मिल सकती है और ऊर्जा आपूर्ति पर बना दबाव भी कम हो सकता है।
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