हेल्दी लाइफस्टाइल के बावजूद क्यों हो सकता है हार्ट अटैक? जानिए वजह जी, हां अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि यदि वे फिट दिखते हैं, संतुलित आहार लेते हैं और नियमित रूप से हल्का-फुल्का व्यायाम करते हैं, तो उनका दिल पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। बाहरी फिटनेस हमेशा दिल की असली स्थिति को नहीं दर्शाती।
एक्सपर्ट की राय: अंदरूनी खतरे नहीं आते नजर
मणिपाल हॉस्पिटल, द्वारका के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. समनजॉय मुखर्जी के अनुसार, अच्छी डाइट और एक्सरसाइज जरूरी जरूर हैं, लेकिन ये दिल की पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देते।
वे बताते हैं कि शरीर के अंदर होने वाली कई प्रक्रियाएं जैसे सूजन (इन्फ्लेमेशन), धमनियों को नुकसान या हार्मोनल असंतुलन बाहरी तौर पर दिखाई नहीं देते। यही कारण हैं जो धीरे-धीरे हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ाते हैं।
भारत में कम उम्र में बढ़ रहे हार्ट के मामले
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में 70 साल से कम उम्र के लोगों में आधे से अधिक हार्ट डिजीज के मामले सामने आ रहे हैं। यह संकेत देता है कि केवल उम्र या फिटनेस के आधार पर दिल की सेहत का आकलन करना सही नहीं है।
तनाव: एक छुपा हुआ बड़ा खतरा
तनाव आज के समय में एक ऐसा कारक है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह सीधे तौर पर दिखाई नहीं देता, लेकिन डेडलाइन, नींद की कमी और मानसिक दबाव के रूप में शरीर पर असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तनाव से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और शरीर में सूजन की स्थिति बनती है, जो दिल के लिए खतरनाक हो सकती है।
जेनेटिक्स और साइलेंट बीमारियां भी जिम्मेदार
यदि परिवार में पहले से हार्ट डिजीज का इतिहास रहा है, तो जोखिम अपने आप बढ़ जाता है। इसके अलावा, कुछ बीमारियां जैसे हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज बिना लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती हैं। स्टडीज के अनुसार, कई लोगों को यह तक पता नहीं होता कि उन्हें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है।
नींद की कमी भी दिल पर डालती है असर
पर्याप्त और अच्छी नींद दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। नींद की कमी से हार्ट रेट प्रभावित हो सकता है, तनाव बढ़ सकता है और मेटाबॉलिज्म भी बिगड़ सकता है। इसलिए, हेल्दी लाइफस्टाइल में अच्छी नींद को शामिल करना बेहद जरूरी है।
नियमित जांच है सबसे बड़ा बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल फिट दिखना काफी नहीं है। समय-समय पर जरूरी जांच जैसे ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ईसीजी कराना बेहद आवश्यक है। समय रहते जोखिम की पहचान ही दिल को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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