मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक तेल संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जल्द मुलाकात हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों नेताओं की यह बैठक अगले महीने फ्रांस में आयोजित होने वाले G7 Summit के दौरान संभव मानी जा रही है।
फ्रांस में 15 से 17 जून के बीच होने वाले इस सम्मेलन में दुनिया के कई बड़े देशों के नेता शामिल होंगे। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय हालात और आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है।
वैश्विक संकट के बीच अहम होगी बैठक
Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप G7 नेताओं की बैठक में हिस्सा लेंगे। वहीं फ्रांस पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।
इसी वजह से कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों नेताओं के बीच फ्रांस में द्विपक्षीय बैठक हो सकती है। माना जा रहा है कि इस दौरान मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट, तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक महंगाई जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
मोदी और ट्रंप की आखिरी मुलाकात कब हुई थी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की पिछली मुलाकात फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में हुई थी। इसके बाद करीब 16 महीने बाद दोनों नेता फिर से आमने-सामने आ सकते हैं।
उस समय पीएम मोदी के अमेरिकी दौरे के बाद रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे। इससे दोनों देशों के संबंधों में कुछ दूरी देखने को मिली थी। हालांकि अब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पूरी हो चुकी है, जिसके बाद रिश्तों में सुधार माना जा रहा है।
फ्रांस ने पहले ही कर दी थी पुष्टि
फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में एक बयान जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की G7 Summit में भागीदारी की पुष्टि की थी। यह जानकारी विदेश मंत्री एस. जयशंकर और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल के बीच हुई बातचीत के बाद सामने आई थी।
यह चर्चा G7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई थी, जिसमें दोनों देशों ने भारत की भूमिका को अहम बताया। फ्रांस ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने Evian Summit में शामिल होने की पुष्टि कर दी है।
G7 में सदस्य नहीं, फिर भी भारत को मिला न्योता
भारत G7 समूह का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के कारण उसे लगातार आमंत्रित किया जाता रहा है। फ्रांस ने इस बार भी भारत को साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक चुनौतियों के दौर में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है, जिसके चलते G7 देशों के लिए भारत का सहयोग महत्वपूर्ण बन गया है।
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