केरल में कांग्रेस की बड़ी चुनावी जीत के बाद अब मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर सियासी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। एआईसीसी महासचिव K. C. Venugopal के संभावित मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में उभरने की चर्चाओं के बीच वायनाड में कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में खास तौर पर Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi Vadra को निशाना बनाया गया है।
पोस्टरों में दी गई राजनीतिक चेतावनी
वायनाड जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय के पास लगाए गए पोस्टरों में दावा किया गया कि यदि कांग्रेस हाईकमान ने केसी वेणुगोपाल का समर्थन किया तो वायनाड का हाल भी अमेठी जैसा हो सकता है। कुछ पोस्टरों में गांधी परिवार के फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि केरल की जनता “गलत राजनीतिक निर्णयों” को स्वीकार नहीं करेगी। इसके अलावा पोस्टरों में यह चेतावनी भी दी गई कि राहुल और प्रियंका गांधी भविष्य में वायनाड सीट से दोबारा चुनाव नहीं जीत पाएंगे। पोस्टरों में केसी वेणुगोपाल को केवल राहुल गांधी का करीबी सहयोगी बताते हुए उनकी नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल खड़े किए गए।
कांग्रेस की जीत के बाद शुरू हुई सीएम पद की दौड़
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 140 में से 102 सीटें जीतकर शानदार वापसी की। इस जीत के साथ पार्टी ने करीब एक दशक बाद सत्ता में वापसी की है, जबकि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा केवल 35 सीटों पर सिमट गया। हालांकि चुनावी सफलता के तुरंत बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर गुटबाजी तेज हो गई। फिलहाल मुख्यमंत्री पद की दौड़ में तीन बड़े नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं — V. D. Satheesan, K. C. Venugopal और Ramesh Chennithala।
दिल्ली में हाईकमान की लगातार बैठकें
मुख्यमंत्री चयन को लेकर जारी असमंजस के बीच राहुल गांधी ने मंगलवार को दिल्ली में केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्षों के साथ बैठक की। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में संभावित मुख्यमंत्री चेहरे पर नेताओं की राय ली गई। बताया जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान राज्य नेतृत्व और संगठन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में जुटा है। चर्चा के दौरान वेणुगोपाल, सतीशन और चेन्निथला के नामों पर विस्तार से विचार किया गया।
संगठन बनाम नेतृत्व की लड़ाई बनी बड़ी चुनौती
केरल कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे शक्ति संघर्ष को भी उजागर कर रही है। एक ओर संगठनात्मक पकड़ रखने वाले नेता हैं, जबकि दूसरी तरफ विधायी अनुभव और जनाधार वाले चेहरे अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री पद का फैसला केवल केरल की राजनीति ही नहीं बल्कि कांग्रेस की राष्ट्रीय रणनीति पर भी असर डाल सकता है।
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