पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल, रुपये पर बढ़ता दबाव और विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर चिंता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से बचत और संयम अपनाने की अपील की है।
हैदराबाद में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अगले एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने, अनावश्यक विदेश यात्राएं टालने और जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम अपनाने का आग्रह किया। उनका कहना था कि मौजूदा वैश्विक हालात में विदेशी मुद्रा की बचत देश के लिए बेहद जरूरी हो गई है।
होरमुज जलडमरूमध्य संकट से बढ़ी चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। खास तौर पर होरमुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई अस्थिरता ने तेल आपूर्ति को लेकर दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में शामिल माना जाता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। इसके बाद ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता और गहरी हो गई है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर क्यों बढ़ रहा दबाव
भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। बढ़ते आयात बिल के कारण रुपये में कमजोरी देखने को मिल रही है और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में देश ने वर्क फ्रॉम होम, वर्चुअल मीटिंग और वीडियो संवाद जैसे विकल्पों को अपनाया था। अब फिर से इन व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि ईंधन की खपत कम हो सके और विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके।
मेट्रो, कार पूल और इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मेट्रो रेल, कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देकर ईंधन की खपत कम की जा सकती है। इसके अलावा उन्होंने माल परिवहन को सड़क मार्ग के बजाय रेलवे की ओर शिफ्ट करने की जरूरत भी बताई, ताकि डीजल पर निर्भरता कम हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होरमुज जलडमरूमध्य में संकट लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं।
सोना खरीदने को लेकर पीएम मोदी की बड़ी अपील
प्रधानमंत्री की सबसे ज्यादा चर्चा में रही अपील सोने की खरीद को लेकर थी। उन्होंने देशवासियों से अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचने का आग्रह किया। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में शामिल है। त्योहारों और शादी के सीजन में सोने की मांग तेजी से बढ़ जाती है। चूंकि सोना मुख्य रूप से विदेशों से आयात किया जाता है, इसलिए इसकी अधिक खरीद से बड़ी मात्रा में डॉलर विदेश भेजना पड़ता है, जिसका असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।
तेल और सोना: अर्थव्यवस्था के लिए दोहरी चुनौती
अर्थशास्त्रियों के अनुसार कच्चा तेल और सोना भारत के लिए दो ऐसे आयात हैं जिनका भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जाता है। जब तेल महंगा होता है और साथ ही सोने की मांग भी बढ़ती है, तब देश पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ता है। इससे चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और रुपये की स्थिति कमजोर हो सकती है। यही वजह है कि आर्थिक संकट के समय सरकारें अक्सर सोने के आयात को नियंत्रित करने के कदम उठाती रही हैं। पहले भी आयात शुल्क बढ़ाने और वैकल्पिक निवेश योजनाओं को बढ़ावा देने जैसे फैसले लिए जा चुके हैं।
विदेश यात्रा और विदेशी शादियों पर भी सलाह
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अनावश्यक विदेश यात्राएं और विदेशी पर्यटन फिलहाल टालने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग में विदेश घूमने और विदेश में शादी करने का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन मौजूदा हालात में विदेशी मुद्रा बचाना राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुका है। अमेरिका-ईरान तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय सोना बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। आमतौर पर युद्ध और भू-राजनीतिक संकट के समय निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं, जिससे इसकी कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि इस बार स्थिति कुछ अलग दिखाई दे रही है। तेल की कीमतों में उछाल के कारण महंगाई और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में निवेशकों का रुझान ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की ओर भी बढ़ रहा है। यही वजह है कि सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री की अपील को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल भी उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है और अब उसका बोझ आम लोगों पर डाला जा रहा है। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री की अपील को दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा कि इससे भारत ऊर्जा क्षेत्र में अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सकेगा।
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