स्विट्जरलैंड में हुई पहले दौर की बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच कई अहम मुद्दों पर शुरुआती सहमति बनी है। इस समझौते के तहत ईरान को 60 दिनों तक तेल बिक्री की छूट दी गई है। यह फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार के साथ-साथ भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत पहले ईरान से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता था। हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद इसमें कमी आ गई थी। अब ईरान को मिली इस राहत से भारत को भी फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
60 दिनों की छूट में क्या शामिल है?
अमेरिका और ईरान के बीच हुए 60 दिनों के समझौते (MoU) के तहत तेहरान को कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी गई है। इसके बदले ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को प्रभावित नहीं करने का आश्वासन दिया है। यह छूट 21 अगस्त तक प्रभावी रहेगी। यानी इस अवधि में ईरान कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री जारी रख सकेगा। कुछ घंटे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा था कि स्विट्जरलैंड में चल रही वार्ता में “काफी अच्छी प्रगति” हुई है।
ट्रेजरी विभाग ने जारी किया ‘ईरान जनरल लाइसेंस एक्स’
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ‘ईरान जनरल लाइसेंस एक्स’ जारी किया है। इसके तहत 21 अगस्त तक ईरान से निकलने वाले कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, डिलीवरी और बिक्री की अनुमति दी गई है। लाइसेंस के अनुसार, ईरानी मूल के कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल और पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, बिक्री, डिलीवरी और उतारने से जुड़े वे सभी आवश्यक लेन-देन, जो पहले प्रतिबंधों के दायरे में आते थे, अब 21 अगस्त तक वैध रहेंगे।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में ईरान को मिली तेल निर्यात छूट भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिसका असर भारत पर भी पड़ा था। अब 60 दिनों की इस राहत से भारत को तेल आपूर्ति और कीमतों के मोर्चे पर कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
पहले ईरान का बड़ा खरीदार था भारत
अमेरिका द्वारा ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाने से पहले भारत, ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार था। साल 2019 में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान प्रतिबंधों के बाद भारत ने ईरान से तेल खरीद में कमी कर दी थी। बाद में यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार बनकर उभरा। ऐसे में ईरान को मिली नई छूट भारत के ऊर्जा आयात समीकरणों पर भी असर डाल सकती है।
मुख्य बातें
- अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत में शुरुआती सहमति बनी।
- ईरान को 60 दिनों तक तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बेचने की अनुमति मिली।
- छूट 21 अगस्त तक प्रभावी रहेगी।
- ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित न करने का आश्वासन दिया।
- भारत को तेल आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर राहत मिल सकती है।
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