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भारत के इस गुप्त समुद्री प्लान से क्यों बढ़ी पड़ोसी देशों की चिंता?

भारत अपनी समुद्री सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। भारतीय नौसेना की महत्वाकांक्षी Project 18 योजना के तहत एक अत्याधुनिक और विशाल क्रूजर क्लास युद्धपोत विकसित करने की तैयारी चल रही है। यह जहाज आकार, तकनीक और मारक क्षमता के मामले में भारतीय नौसेना के मौजूदा युद्धपोतों से कहीं आगे होगा।

13,000 टन तक हो सकता है युद्धपोत का वजन

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए युद्धपोत का विस्थापन भार लगभग 11,000 से 13,000 टन के बीच हो सकता है। इसकी लंबाई करीब 180 मीटर तक रहने की संभावना है। अपने विशाल आकार के कारण यह समुद्र में तैरते हुए एक मजबूत किले जैसा दिखाई देगा। Project 18 के तहत बनने वाला यह पोत भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे बड़ा सरफेस कॉम्बैटेंट माना जा रहा है।

एडवांस इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन तकनीक से होगा लैस

इस युद्धपोत में इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (IEP) तकनीक का उपयोग किए जाने की संभावना है। यह आधुनिक प्रणाली जहाज को अधिक ऊर्जा उपलब्ध कराएगी और संचालन के दौरान शोर को बेहद कम रखेगी। कम ध्वनि के कारण दुश्मन की पनडुब्बियों के लिए इसकी पहचान करना मुश्किल हो सकता है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता और बढ़ जाएगी।

भविष्य के हाईटेक हथियारों के लिए मिलेगी अतिरिक्त शक्ति

Project 18 के इस युद्धपोत को अत्यधिक विद्युत क्षमता से लैस किया जाएगा। यही ऊर्जा भविष्य में उपयोग होने वाले आधुनिक हथियारों और उन्नत रक्षा प्रणालियों को संचालित करने में मदद करेगी। जहाज में अत्याधुनिक रडार सिस्टम और डायरेक्टेड एनर्जी आधारित तकनीकों को शामिल किए जाने की संभावना है, जो आने वाले खतरों का तेजी से जवाब देने में सक्षम होंगी।

कम क्रू में होगा संचालन, बढ़ेगी दक्षता

यह युद्धपोत बड़े स्तर पर डिजिटल और ऑटोमेटेड तकनीकों से संचालित होगा। आधुनिक सिस्टम और स्मार्ट मशीनों की मदद से इसे चलाने के लिए मौजूदा जहाजों की तुलना में लगभग 25 से 30 प्रतिशत कम कर्मियों की आवश्यकता पड़ सकती है। इससे परिचालन लागत में कमी आएगी और कार्यक्षमता में सुधार होगा।

मल्टीडोमेन कमांड हब के रूप में करेगा काम

Project 18 केवल एक युद्धपोत नहीं होगा, बल्कि समुद्री युद्ध संचालन का कमांड सेंटर भी बन सकता है। यह जहाज हवाई ड्रोन, समुद्री सतह पर संचालित मानवरहित वाहनों और पानी के भीतर काम करने वाले ड्रोन सिस्टम को एक साथ नियंत्रित और निर्देशित करने में सक्षम होगा। इससे नौसेना को नेटवर्क आधारित युद्ध संचालन में महत्वपूर्ण बढ़त मिल सकती है।

144 VLS सेल्स से लैस हो सकता है जहाज

इस युद्धपोत की सबसे बड़ी खासियत इसकी विशाल हथियार क्षमता मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें 144 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) सेल्स लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा जहाज के मध्य भाग में अतिरिक्त स्लांट लॉन्चर भी शामिल किए जाने की संभावना है। हथियारों की यह क्षमता इसे एशिया के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में शामिल कर सकती है।

मजबूत एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम बनेगा ढाल

Project 18 के युद्धपोत को बहुस्तरीय एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस करने की योजना है। यह सुरक्षा कवच दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों से रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही इसमें उन्नत एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता भी शामिल की जा सकती है।

लंबी दूरी से बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाने में सक्षम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह युद्धपोत 250 से 350 किलोमीटर की दूरी से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाने और उन्हें बीच रास्ते में ही निष्क्रिय करने की क्षमता रख सकता है। यदि यह क्षमता शामिल होती है, तो भारतीय नौसेना की समुद्री रक्षा व्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी।

भारत की समुद्री शक्ति को मिलेगा नया आयाम

Project 18 भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। उन्नत तकनीक, विशाल हथियार क्षमता और नेटवर्क आधारित युद्ध संचालन की विशेषताओं के साथ यह युद्धपोत भविष्य में भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक शक्ति को नई दिशा दे सकता है।


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