इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में भारतीय टीम की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम 3-0 से पिछड़ चुकी है और सीरीज भी हाथ से निकल गई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर हार की सबसे बड़ी वजह क्या रही—अनुभव की कमी या खिलाड़ियों का खराब प्रदर्शन?
क्या इंग्लैंड की परिस्थितियों में अनुभव की कमी बनी कारण?
इस सीरीज से पहले भारत के 8 खिलाड़ी ऐसे थे जिन्होंने इंग्लैंड में कभी टी20 मुकाबला नहीं खेला था। इनमें अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, प्रसिद्ध कृष्णा, शिवम दुबे, वाशिंगटन सुंदर, प्रिंस यादव, वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन शामिल हैं। वहीं सूर्यांश शेडगे का राष्ट्रीय टीम के साथ यह पहला इंग्लैंड दौरा है। दूसरी ओर, श्रेयस अय्यर, अक्षर पटेल, ईशान किशन, अर्शदीप सिंह और रवि बिश्नोई पहले इंग्लैंड में टी20 इंटरनेशनल खेल चुके थे।
क्या सिर्फ अनुभव की कमी से मिली हार?
सिर्फ अनुभव की कमी को हार की वजह नहीं माना जा सकता। टीम के अधिकांश खिलाड़ी लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं। कई खिलाड़ी इंग्लैंड की परिस्थितियों में अन्य स्तर पर क्रिकेट खेल चुके हैं, जबकि कुछ काउंटी क्रिकेट का भी अनुभव रखते हैं। वैभव सूर्यवंशी भी पहले यहां खेल चुके हैं। इसलिए अनुभव को हार का सबसे बड़ा कारण कहना सही नहीं होगा।
टॉप ऑर्डर की नाकामी बनी सबसे बड़ी समस्या
पहले मैच के बाद लगातार तीन मुकाबलों में अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी ने पारी की शुरुआत की, लेकिन कोई भी मजबूत शुरुआत नहीं दिला सके।
अभिषेक शर्मा ने दूसरे टी20 में 43 रन बनाए, लेकिन तीसरे और चौथे मुकाबले में क्रमशः 10 और 16 रन ही बना सके। वहीं वैभव सूर्यवंशी ने तीन मैचों में केवल 42 रन (14, 13 और 15) बनाए।
ईशान किशन भी अपनी टी20 रैंकिंग के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके। पहले मैच में शून्य, दूसरे में 49 रन बनाने के बाद तीसरे और चौथे मैच में वह क्रमशः 13 और 4 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए।
मिडिल ऑर्डर और ऑलराउंडर्स भी उम्मीदों पर नहीं उतरे
श्रेयस अय्यर ने पहले मुकाबले में 68 रन बनाए थे, हालांकि वह मैच रद्द हो गया। दूसरे मैच में उन्होंने 37 और तीसरे में सिर्फ 5 रन बनाए। चौथे मुकाबले में उन्होंने नाबाद 80 रन की शानदार पारी खेली, लेकिन दूसरे बल्लेबाज उनका साथ नहीं दे सके।
उपकप्तान तिलक वर्मा पूरी सीरीज में संघर्ष करते नजर आए। उन्होंने चार पारियों में सिर्फ 51 रन बनाए, जिसके बाद उन्हें टीम से बाहर करने की चर्चा भी शुरू हो गई। शिवम दुबे ने पहले मैच में 42 रन बनाए, लेकिन उसके बाद क्रमशः 5, 2 और 22 रन ही बना सके। मिडिल ऑर्डर में उनसे जिस प्रदर्शन की उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हुई।
अक्षर पटेल का अनुभव भी नहीं आया काम
अक्षर पटेल को चारों मुकाबलों में मौका मिला और उन्हें इंग्लैंड में खेलने का अनुभव भी था। इसके बावजूद वह बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में प्रभाव नहीं छोड़ सके। उन्होंने चार पारियों में केवल 16 रन बनाए, जबकि तीन मैचों में सिर्फ 2 विकेट हासिल किए।
गेंदबाजी भी नहीं निभा सकी जिम्मेदारी
प्रिंस यादव ने आयरलैंड के खिलाफ डेब्यू में अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती दो मैचों में उन्हें मौका नहीं मिला। तीसरे टी20 में उन्होंने 2 विकेट लिए, जबकि चौथे मुकाबले में कोई सफलता नहीं मिली।
रवि बिश्नोई दूसरे टी20 में काफी महंगे साबित हुए। उन्होंने 60 रन खर्च किए, जिसमें एक ओवर में 29 रन भी दिए। इसके बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। वरुण चक्रवर्ती भी दो पारियों में सिर्फ 1 विकेट ही ले सके। उन्होंने पहले मैच में 37 और दूसरे में 35 रन दिए, जिसके बाद उनकी जगह वाशिंगटन सुंदर को शामिल किया गया।
अर्शदीप सिंह भी नहीं डाल सके निर्णायक असर
अर्शदीप सिंह टीम के सबसे अनुभवी गेंदबाजों में शामिल हैं, लेकिन वह भी लगातार प्रभावी प्रदर्शन नहीं कर सके। दूसरे टी20 में उन्होंने 3 विकेट लिए, जबकि तीसरे मुकाबले में कोई विकेट नहीं मिला। चौथे मैच में भारत की ओर से मिलने वाला एकमात्र विकेट भी अर्शदीप सिंह के नाम रहा।
इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारत की हार को केवल अनुभव की कमी से जोड़ना उचित नहीं होगा। बल्लेबाजी में टॉप ऑर्डर की लगातार विफलता, मिडिल ऑर्डर का अपेक्षित योगदान न देना और गेंदबाजों का असरदार प्रदर्शन नहीं कर पाना टीम की हार के प्रमुख कारण बनकर सामने आए। यही वजह रही कि भारत पांच मैचों की सीरीज में 3-0 से पिछड़ गया और सीरीज भी गंवा बैठा।
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